बिहार

किशनगंज के स्कूलों में 'सुरक्षित बचपन अभियान', बच्चों को बताए जा रहे कानूनी अधिकार

किशनगंज के स्कूलों में सुरक्षित बचपन अभियान के जरिए बच्चों को बाल विवाह, बाल श्रम और पॉक्सो एक्ट जैसे कानूनों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

Sonu Nigam· 28 Oct, 4:43 PM · 2 मिनट
किशनगंज के स्कूलों में 'सुरक्षित बचपन अभियान', बच्चों को बताए जा रहे कानूनी अधिकार

बिहार के किशनगंज जिले में बच्चों को शोषण से बचाने और उन्हें उनके कानूनी अधिकारों के प्रति सजग करने के लिए एक बड़ी मुहिम शुरू की गई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) की ओर से 'सुरक्षित बचपन अभियान' चलाया जा रहा है, जिसके तहत जिले के अलग-अलग स्कूलों में विधिक जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा बाल विवाह या बाल श्रम जैसी कुरीतियों का शिकार न हो और उसे एक सुरक्षित माहौल मिले।

यह अभियान काफी लंबे समय तक चलेगा और इसकी समय सीमा 31 अक्टूबर 2026 तक तय की गई है। हाल ही में नेशनल उच्च विद्यालय, सेंट जेवियर्स इंग्लिश मीडियम स्कूल और बाल मंदिर विद्यालय में विशेष शिविर आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों और वकीलों ने बच्चों के साथ सीधा संवाद किया और उन्हें सरल भाषा में समझाया कि उनके अधिकार क्या हैं और किसी भी विपरीत परिस्थिति में उन्हें क्या करना चाहिए।

बाल विवाह और साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर

शिविरों के दौरान बच्चों को बाल संरक्षण कानून, पॉक्सो एक्ट (POCSO Act), बाल श्रम और साइबर सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक सम्मान और हिंसा मुक्त जीवन जीने का पूरा हक है। यह भी चेतावनी दी गई कि बच्चों के साथ होने वाला किसी भी तरह का दुर्व्यवहार उनके मानसिक और शारीरिक विकास को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

बच्चों को प्रेरित किया गया कि यदि वे बाल विवाह, यौन उत्पीड़न या साइबर अपराध जैसी किसी भी समस्या का सामना करते हैं, तो उन्हें चुप नहीं रहना चाहिए। उन्हें बताया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से वे मुफ्त कानूनी मदद ले सकते हैं। साथ ही, आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पाने के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी साझा की गई।

इस पूरे अभियान में डीएलएसए सचिव ओम शंकर के साथ कई न्यायिक पदाधिकारी, पैनल अधिवक्ता और पारा विधिक स्वयंसेवकों ने अपनी भूमिका निभाई। इस पहल से न केवल बच्चे, बल्कि स्कूल और समाज के अन्य लोग भी बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक सजग होंगे।

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