अपराध

पति की हत्या की साजिश: 4 साल जेल में काटने के बाद आरोपी पत्नी को दिल्ली कोर्ट से मिली जमानत

दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने पति की हत्या की साजिश में आरोपी महिला को 4 साल बाद जमानत दी है। जानें क्या था पूरा मामला और कोर्ट का फैसला।

Sonu Nigam· 28 Oct, 6:56 PM · 2 मिनट
पति की हत्या की साजिश: 4 साल जेल में काटने के बाद आरोपी पत्नी को दिल्ली कोर्ट से मिली जमानत

दिल्ली की एक अदालत ने अपने पति की हत्या की साजिश रचने के आरोप में जेल में बंद एक महिला को नियमित जमानत दे दी है। रोहिणी कोर्ट के एडिशनल सेशन जज मुनीश गर्ग ने महिला की तीसरी जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि महिला पिछले चार साल से अधिक समय से हिरासत में है और मामले की जांच पूरी हो चुकी है।

यह पूरा मामला फरवरी 2022 का है, जब पुलिस को रोहिणी के सेक्टर 24 के पास एक घायल व्यक्ति के मिलने की सूचना मिली थी। घायल व्यक्ति को तुरंत डॉ. बीएसए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। बेगमपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में अभियोजन पक्ष का आरोप था कि यह हत्या एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी, जिसमें मृतक की पत्नी और अन्य आरोपियों ने मिलकर योजना बनाई थी। पुलिस का दावा था कि महिला ने दूसरे आरोपी के साथ संपर्क साधा था और उसे अपने पति की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी थी।

कोर्ट ने किन आधारों पर दी जमानत?

महिला की ओर से पेश वकील रवि ड्राल ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल वारदात के समय मौके पर मौजूद नहीं थी और उसके पास से कोई हथियार या आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि साजिश के आरोप मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर आधारित हैं। हालांकि, सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और महिला ने साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि महिला ने खुद हमला नहीं किया था और न ही उसके पास से कोई हथियार मिला। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि वह 22 फरवरी 2022 से जेल में है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मृतक के पिता और बेटी, जिनके बयानों पर अभियोजन पक्ष भरोसा कर रहा था, उनकी गवाही पहले ही पूरी हो चुकी है।

जमानत मिलते समय महिला ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह रिहा होने के बाद रिठाला की पाल कॉलोनी स्थित अपने ससुराल नहीं जाएगी। साथ ही, उसने यह भी वचन दिया कि मुकदमे के दौरान वह अपने पति की संपत्ति को लेकर कोई भी सिविल कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं करेगी। इन शर्तों और जेल में बिताए गए समय को देखते हुए कोर्ट ने उसे पर्सनल बॉन्ड और जमानतदार जमा करने पर रिहा करने का आदेश दिया।

यह ख़बर दोस्तों तक पहुँचाएँ
शेयर करें

Comments

Leave a comment