दिल्ली: ऐप आधारित बस सेवाओं से यात्री परेशान, ट्रैकिंग फेल और किराया ज्यादा
दिल्ली में ऐप आधारित बस सेवाओं की खराब ट्रैकिंग और महंगे किराए से यात्री परेशान हैं। रिफंड मिलने में भी हो रही है देरी।

देश की राजधानी दिल्ली में सफर करने वाले यात्रियों के लिए ऐप आधारित बस सेवाएं अब सुविधा के बजाय सिरदर्द बनती जा रही हैं। यात्रियों का आरोप है कि जिस तकनीक के भरोसे उन्होंने इन बसों को चुना, वही तकनीक अब धोखा दे रही है। दिल्ली ऐप आधारित बस सेवा की लाइव ट्रैकिंग फेल होने की वजह से लोग घंटों बस स्टॉप पर इंतजार करने को मजबूर हैं, जिससे उनका समय और मानसिक सुकून दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
परेशानी सिर्फ ट्रैकिंग तक ही सीमित नहीं है। यात्रियों ने इन सेवाओं के महंगे किराए पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि उनसे प्रीमियम किराया वसूला जा रहा है, लेकिन बदले में मिलने वाली सुविधाएं बेहद साधारण और निम्न स्तर की हैं। इतना ही नहीं, अगर किसी वजह से टिकट कैंसिल होता है, तो रिफंड पाने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि पैसा वापस मिलने में लंबा समय लग रहा है।
नियमों की अनदेखी और प्रदूषण का दोहरा दबाव
हैरानी की बात यह है कि दिल्ली परिवहन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी बस ऑपरेटरों को व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइसेस (VLTD) और पैनिक बटन चालू रखने होंगे। साथ ही, शिकायतों के निपटारे के लिए एक प्रभावी सिस्टम बनाना भी अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
शहर में परिवहन की यह समस्या ऐसे समय में आई है जब दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से लड़ने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। 1 नवंबर 2026 से लागू हुए नियमों के तहत शहर के बाहर से आने वाले गैर-BS-VI पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। विंटर एक्शन प्लान और इन पाबंदियों के कारण सार्वजनिक परिवहन पर दबाव बढ़ गया है, और ऐसे में ऐप आधारित बसों की यह लापरवाही आम जनता की मुश्किलों को और ज्यादा बढ़ा रही है।