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दिल्ली हाईकोर्ट का 60वां स्थापना दिवस: CJI ने बताया सुप्रीम कोर्ट का खास साथी

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना 60वां स्थापना दिवस मनाया। CJI सूर्यकांत ने कोर्ट की कार्यक्षमता और सुप्रीम कोर्ट के साथ इसके खास रिश्तों पर चर्चा की।

Sonu Nigam· 31 Oct, 1:08 PM · 2 मिनट
दिल्ली हाईकोर्ट का 60वां स्थापना दिवस: CJI ने बताया सुप्रीम कोर्ट का खास साथी

दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को अपना 60वां स्थापना दिवस बेहद गरिमा के साथ मनाया। 31 अक्टूबर 1966 को स्थापित इस संस्थान ने छह दशकों का सफर पूरा कर लिया है। इस खास मौके पर आयोजित कार्यक्रम में देश की न्यायपालिका के दिग्गज जुटे, जहां मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कोर्ट की उपलब्धियों और उसकी कार्यक्षमता की जमकर सराहना की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के बीच एक विशेष रिश्ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली हाईकोर्ट अक्सर सुप्रीम कोर्ट के कार्यभार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, जिसके कारण शीर्ष अदालत कई बार राहत के लिए वकीलों को दिल्ली हाईकोर्ट भेजने का निर्देश देती है। उन्होंने कोर्ट के जजों और वकीलों के समर्पण की तारीफ करते हुए कहा कि बौद्धिक संपदा कानून (Intellectual Property Law) और देश के पहले कोर्ट-संलग्न आर्बिट्रेशन सेंटर की स्थापना में इस कोर्ट का योगदान अग्रणी रहा है।

तकनीक की चुनौतियां और संवैधानिक मर्यादा

बदलते दौर और नई तकनीकों पर चर्चा करते हुए CJI ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक जैसे उभरते खतरों का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब नए मुद्दों पर कानून खामोश हो, तब न्यायपालिका को मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान का सहारा लेना चाहिए। उन्होंने कोर्ट के विशेष बौद्धिक संपदा प्रभाग की प्रतिष्ठा और नागरिक व वाणिज्यिक न्यायशास्त्र को समृद्ध करने में इसकी भूमिका की भी सराहना की।

इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में स्थित होने के कारण दिल्ली हाईकोर्ट की जिम्मेदारियां केवल दिल्ली के अधिकार क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका प्रभाव व्यापक है। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे ने पारदर्शी और त्वरित न्याय के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एन. हरिहरन ने जस्टिस एच.आर. खन्ना जैसे महान न्यायविदों की विरासत को याद किया। उन्होंने कहा कि पिछले छह दशकों में यह संस्थान तमाम दबावों के बावजूद अडिग रहा है और न्याय की मशाल को जलाए रखा है।

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