वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में भारत की बड़ी जीत, करोड़ों लोग गरीबी से बाहर; वित्त मंत्री ने कहा- इसलिए जनता का भरोसा है NDA पर
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत में करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जिस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुशी जताई है।

भारत के लिए एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। वर्ल्ड बैंक की हालिया 'पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने गरीबी कम करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। रिपोर्ट बताती है कि साल 2011 से 2023 के बीच भारत में लगभग 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा (4.20 डॉलर प्रतिदिन) से ऊपर आए हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि देश में आर्थिक सुधार जमीनी स्तर पर असर दिखा रहे हैं।
इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के निरंतर प्रयासों के ठोस परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास और आर्थिक अवसरों के मजबूत आधार के कारण ही NDA सरकार को नागरिकों का भरोसा और जनादेश मिलता है। वित्त मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार उत्पादक रोजगार और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं के जरिए इस प्रगति को आगे बढ़ाती रहेगी।
कैसे आई गरीबी में इतनी बड़ी गिरावट?
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में गरीबी घटने के कई मुख्य कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खपत में मजबूत वृद्धि, रोजगार के बढ़ते अवसर (खासकर महिलाओं के लिए) और खाद्य सब्सिडी जैसे सामाजिक सुरक्षा उपायों ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है। इसके अलावा, बिजली की पहुंच का 99 प्रतिशत तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है।
रिपोर्ट के कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- गरीबी दर: 2011 में जो गरीबी दर 57.7 प्रतिशत थी, वह 2023 तक गिरकर 16.1 प्रतिशत रह गई है।
- अत्यधिक गरीबी: 3 डॉलर प्रतिदिन वाली अत्यधिक गरीबी 27.1 प्रतिशत से घटकर महज 2.6 प्रतिशत रह गई है।
- रोजगार: 2017 से 2023 के बीच देश में 13.4 करोड़ नए रोजगार बढ़े हैं, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी सबसे अहम रही है।
- गैर-मौद्रिक गरीबी: 2005-06 में यह 53.8 प्रतिशत थी, जो 2022-23 तक घटकर 15.5 प्रतिशत पर आ गई है।
हालांकि, रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक के राज्यों में अभी भी गरीब आबादी का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 57 प्रतिशत) मौजूद है। वर्ल्ड बैंक का मानना है कि भविष्य में गरीबी को और कम करने के लिए इन विशेष क्षेत्रों में उत्पादक रोजगार बढ़ाना बेहद जरूरी होगा। साथ ही, अमीर और गरीब के बीच वेतन के अंतर को पाटना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।