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जामिया मिलिया इस्लामिया: 20 साल पुराना छात्र संघ चुनाव विवाद खत्म, प्रशासन के फैसले से कर्मचारियों में खुशी

जामिया मिलिया इस्लामिया में 20 साल पुराने छात्र संघ चुनाव विवाद का समाधान हुआ। यूनिवर्सिटी स्टाफ ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है।

Sonu Nigam· 31 Oct, 1:08 PM · 2 मिनट
जामिया मिलिया इस्लामिया: 20 साल पुराना छात्र संघ चुनाव विवाद खत्म, प्रशासन के फैसले से कर्मचारियों में खुशी

देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) में पिछले दो दशकों से चला आ रहा छात्र संघ चुनावों का गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है। इस ऐतिहासिक समाधान के बाद यूनिवर्सिटी के करीब 2,000 टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ सदस्यों ने अंसारी ऑडिटोरियम के लॉन में एक धन्यवाद कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें उन्होंने प्रशासन के इस कदम की जमकर सराहना की।

यूनिवर्सिटी कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन ने जिस सूझबूझ और धैर्य के साथ इस संवेदनशील मुद्दे को हल किया है, वह काबिले तारीफ है। खासकर यूनिवर्सिटी के 106वें स्थापना दिवस के मौके पर आए इस फैसले को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। स्टाफ सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासन ने छात्रों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया कि पढ़ाई और परीक्षाओं के काम में कोई बाधा न आए।

संवाद से निकला समाधान, हिंसा की कड़ी निंदा

इस विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासन ने पिछले दो हफ्तों में प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ करीब आठ दौर की बैठकें कीं। कर्मचारियों ने कहा कि पिछले कई प्रशासनों ने इस मुद्दे को या तो टाल दिया था या अनसुलझा छोड़ दिया था, लेकिन वर्तमान प्रशासन ने संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से इसे हल कर एक मिसाल पेश की है। इस पूरी प्रक्रिया में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन की भी सराहना की गई।

हालांकि, जहाँ एक तरफ समाधान का स्वागत हुआ, वहीं स्टाफ ने यूनिवर्सिटी परिसर में हुई तोड़फोड़ और दीवारों पर लिखे गए राष्ट्रविरोधी नारों पर गहरा रोष जताया। उन्होंने मांग की कि ऐसी हरकतें करने वाले लोगों और समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा, कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को 'जीत-हार' की लड़ाई के रूप में पेश करने वालों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने जानबूझकर प्रशासन, प्रोक्टोरियल टीम और हॉस्टल वार्डन की छवि खराब करने की कोशिश की, लेकिन कल रात आए आदेश ने ऐसे सभी गलत नैरेटिव्स को खत्म कर दिया है।

स्टाफ ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक पक्ष की जीत नहीं, बल्कि जामिया की लोकतांत्रिक परंपराओं और मूल्यों की जीत है। उन्होंने कहा कि शांति, अहिंसा और भाईचारा इस संस्थान की पहचान है और यह फैसला उसी संस्कृति को मजबूत करता है।

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