मियापुर जमीन मामला: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश सीएम रेवंत रेड्डी, बोले- 'यह BRS के चेहरे पर तमाचा है'
तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी ने मियापुर जमीन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और पूर्व सीएम केसीआर पर गंभीर आरोप लगाए।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मियापुर की बेशकीमती जमीनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए ऐतिहासिक फैसले का जोरदार स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने इस फैसले को पिछली बीआरएस (BRS) सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के चेहरे पर एक करारा तमाचा करार दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम रेड्डी ने कहा कि शीर्ष अदालत के इस निर्णय ने मियापुर की लगभग 50,000 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को बचा लिया है।
मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर, उनके करीबी रिश्तेदार दामोदर राव और 'गोल्डस्टोन' प्रसाद पर मियापुर की जमीनों पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इस जमीन के बदले दामोदर राव को महंगी गाड़ियां दी गईं और केसीआर को किकबैक (रिश्वत) मिला। रेवंत रेड्डी के अनुसार, सरकार ने अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखा, जिसके परिणामस्वरूप यह जीत मिली। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को पहले ही निर्देश दे दिए गए हैं कि इन जमीनों पर तुरंत सरकारी नियंत्रण स्थापित किया जाए।
भ्रष्टाचार और जमीन हड़पने के आरोपों पर हमला
बीआरएस नेताओं पर हमला जारी रखते हुए सीएम ने आरोप लगाया कि केसीआर और उनके परिवार ने हैदराबाद सहित पूरे तेलंगाना में कीमती जमीनों को हड़पने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उन्होंने विधायक, सांसद और पीसीसी अध्यक्ष रहते हुए इस जमीन घोटाले के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जिसके कारण तत्कालीन बीआरएस सरकार ने उनके खिलाफ साजिश रची और उन्हें जेल भेजा।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि सरकार अब इन बेशकीमती जमीनों को बेचने की योजना बना रही है, जिससे मिलने वाले फंड का उपयोग सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए किया जाएगा। इस संबंध में जल्द ही कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया जाएगा और संसाधन जुटाने वाली कैबिनेट उप-समिति इन परियोजनाओं की जांच करेगी।
रेवंत रेड्डी ने दावा किया कि 2023 से अब तक राज्य सरकार ने लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपये की जमीन को अवैध कब्जे से बचाया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मनचिरेवुला में 143 एकड़ जमीन, जिसे केटीआर (KTR) बिल्डरों के साथ मिलकर हड़पना चाहते थे, उसे बचाकर वहां पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए स्कूल बनाया गया है। इसके अलावा गच्चीबोवली, मामिडीपल्ली और गुर्रमगुडा के वन क्षेत्रों में भी बीआरएस नेताओं की कोशिशों को कानूनी लड़ाई के जरिए नाकाम किया गया।
अंत में, मुख्यमंत्री ने बीआरएस को विधानसभा में जमीन अतिक्रमण के मुद्दे पर बहस के लिए चुनौती दी और सवाल किया कि मियापुर जमीन मामले में कोर्ट के फैसले के बाद बीआरएस नेता अब चुप्पी क्यों साधे हुए हैं।