दिल्ली एनसीआर

चलती कार को बनाया कॉल सेंटर, दिल्ली पुलिस ने हाई-टेक साइबर ठगों के गिरोह को दबोचा

दिल्ली पुलिस ने चलती कार से संचालित हाई-टेक साइबर फ्रॉड नेटवर्क को पकड़ा। तीन आरोपी गिरफ्तार, कई फर्जी दस्तावेज बरामद।

Sonu Nigam· 31 Oct, 1:07 PM · 2 मिनट
चलती कार को बनाया कॉल सेंटर, दिल्ली पुलिस ने हाई-टेक साइबर ठगों के गिरोह को दबोचा

दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराधियों के एक ऐसे अनोखे और शातिर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो पुलिस की नजरों से बचने के लिए एक चलती कार को अपना ऑफिस बना चुके थे। जी हां, यह गिरोह एक मारुति सुजुकी ब्रेजा कार के अंदर से अपना पूरा कॉल सेंटर चला रहा था ताकि लोकेशन ट्रैक न की जा सके। पुलिस ने इस ऑपरेशन में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान लोकेश तोमर, तुषार और हिमांशु राठौर के रूप में हुई है।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के रहने वाले नीलेश विश्वकर्मा ने धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। नीलेश को झांसा दिया गया था कि उनकी पुरानी इंश्योरेंस पॉलिसी के 45 लाख रुपये वापस दिलाने के लिए 'प्रोसेसिंग फीस' देनी होगी। इस लालच में आकर पीड़ित ने 65,000 रुपये ठगों को दे दिए। शिकायत मिलते ही ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने एफआईआर दर्ज की और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की मदद से संदिग्ध लेनदेन का पीछा किया, जो हिमांशु राठौर तक जा पहुंचा।

कमीशन के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराते थे आरोपी

पुलिस जांच में सामने आया कि हिमांशु राठौर कमीशन के बदले ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे ट्रांसफर करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जबकि लोकेश तोमर इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड था और तालमेल बिठाता था। जब पुलिस ने इन आरोपियों को गिरफ्तार किया, तो उनके पास से एक सफेद कार, सात मोबाइल फोन, 15 बैंक और डेबिट कार्ड, पांच पैन कार्ड, चार आधार कार्ड, छह चेकबुक और तीन पासबुक बरामद हुईं। इसके अलावा, पुलिस को ग्राहकों की लिस्ट वाले नौ पन्ने और एक फर्जी सील भी मिली है।

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार मुंबई और तेलंगाना जैसे राज्यों में चल रहे अन्य साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े हैं।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट के जॉइंट कमिश्नर चिन्मय बिस्वाल ने बताया कि 'ऑपरेशन साइबरहॉक 6.0' के तहत 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में छापेमारी की गई है। इस बड़े अभियान में अब तक 944 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और 2,081 नोटिस जारी किए गए हैं। पुलिस अब उन मुख्य हैंडलर्स की तलाश कर रही है जो विदेश बैठकर इन नेटवर्कों को संचालित कर रहे हैं।

यह ख़बर दोस्तों तक पहुँचाएँ
शेयर करें

Comments

Leave a comment