जुलाई जैसा हाल न हो इसलिए अक्टूबर में लगाई धारा 163, दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कारण
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जुलाई जैसी कानून-व्यवस्था की स्थिति से बचने के लिए अक्टूबर में धारा 163 लागू की गई थी।

राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और सार्वजनिक सभाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर दिल्ली पुलिस अब सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी सफाई दे रही है। दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि अक्टूबर के दौरान शहर के कई संवेदनशील इलाकों में धारा 163 (BNSS) लागू करने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि जुलाई में हुए NEET पेपर लीक प्रदर्शनों जैसी कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति दोबारा पैदा न हो।
पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक अतिरिक्त हलफनामे में स्पष्ट किया कि नई दिल्ली जिला बेहद संवेदनशील है। यहाँ जंतर-मंतर, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट जैसे महत्वपूर्ण स्थान हैं। पुलिस का तर्क है कि अगर बड़ी भीड़ को अनियंत्रित रूप से इकट्ठा होने दिया जाता, तो इससे न केवल ट्रैफिक बाधित होता, बल्कि आम लोगों की जान को खतरा हो सकता था और सार्वजनिक शांति भंग होने की पूरी आशंका थी।
इन इलाकों में थी पाबंदी और ये थे कारण
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने सात अलग-अलग आदेश अदालत के सामने रखे हैं, जो कनॉट प्लेस, तुगलक रोड, पार्लियामेंट स्ट्रीट, चाणक्यपुरी, बाराखंबा रोड, सफदरजंग एन्क्लेव और डिफेंस कॉलोनी से संबंधित हैं। इन आदेशों के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने, नारेबाजी करने, भाषण देने और बैनर-पोस्टर या लाठियां ले जाने पर रोक लगाई गई थी।
पुलिस ने अदालत को समझाया कि यह कोई 'ब्लैंकेट बैन' यानी पूरे शहर पर एक साथ लगाई गई पाबंदी नहीं थी, बल्कि अलग-अलग उप-मंडलों ने अपनी जरूरत के हिसाब से इसे लागू किया था। उदाहरण के तौर पर:
- कनॉट प्लेस: यहाँ भारी ट्रैफिक और पैदल चलने वालों की भीड़ रहती है, इसलिए सुरक्षा और सुचारू यातायात के लिए यह कदम उठाया गया।
- तुगलक रोड: यहाँ इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और विदेशी दूतावास स्थित हैं, इसलिए भारी वाहनों (ट्रक और ट्रैक्टर) के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई थी।
- पार्लियामेंट स्ट्रीट और चाणक्यपुरी: इन इलाकों में प्रधानमंत्री आवास और राष्ट्रपति भवन जैसे अति-संवेदनशील केंद्र हैं, जहाँ किसी भी तरह की अनियंत्रित भीड़ सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती थी।
यह पूरा मामला सीपीआई(एम) नेता एम.ए. बेबी की एक याचिका के बाद सामने आया है, जिसमें दिल्ली पुलिस से धारा 163 के तहत जारी आदेशों का विवरण मांगा गया था। पुलिस ने साफ किया कि ऐसी पाबंदियां केवल आपातकालीन कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ही लगाई जाती हैं।