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दिल्ली में बारिश से प्रदूषण में मिलती है सिर्फ अस्थायी राहत, 22 साल की स्टडी में खुलासा

22 साल की स्टडी में खुलासा: दिल्ली में बारिश के बाद हवा जल्द ही फिर जहरीली हो जाती है। जानें रिसर्च में क्या सामने आया।

Sonu Nigam· 31 Oct, 1:08 PM · 2 मिनट
दिल्ली में बारिश से प्रदूषण में मिलती है सिर्फ अस्थायी राहत, 22 साल की स्टडी में खुलासा

राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए बारिश अक्सर राहत की फुहारें लेकर आती है, लेकिन क्या यह राहत हवा की शुद्धता के लिए भी उतनी ही प्रभावी है? हाल ही में हुए एक विस्तृत शोध ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। 22 साल तक चले एक व्यापक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि दिल्ली में होने वाली बारिश से वायु प्रदूषण में मिलने वाली राहत बेहद मामूली और अस्थायी होती है। रिसर्च के मुताबिक, बारिश के बाद हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व बहुत जल्द वापस अपने पुराने स्तर पर पहुंच जाते हैं।

वैज्ञानिकों ने साल 2003 से 2024 के बीच हुई 612 बारिश की घटनाओं का बारीकी से विश्लेषण किया। इस अध्ययन में उन दिनों को चुना गया जब 5 मिमी से अधिक बारिश हुई थी। नतीजों ने चौंकाया; पाया गया कि 50% से ज्यादा मामलों (करीब 310 बार) में बारिश के पांच दिनों के भीतर प्रदूषण का स्तर फिर से वैसा ही हो गया जैसा बारिश से पहले था। वहीं, करीब 45% मामलों में प्रदूषकों को अपने मूल स्तर पर लौटने में 30 दिन से भी ज्यादा का समय लगा।

बारिश की मात्रा का प्रदूषण से कोई खास संबंध नहीं

इस स्टडी की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बारिश कितनी ज्यादा हुई, इसका प्रदूषण कम होने की रफ्तार से कोई खास संबंध नहीं पाया गया। यानी चाहे हल्की बारिश हो या भारी, हवा साफ होने का समय लगभग एक जैसा ही रहा। मौसम के हिसाब से रिकवरी टाइम में थोड़ा अंतर देखा गया: मानसून के दौरान औसतन छह दिन, गर्मियों और सर्दियों में पांच दिन, जबकि मानसून के बाद के समय में केवल तीन दिनों में प्रदूषण वापस लौट आया।

इस रिसर्च के मुख्य लेखक डॉ. सथींद्रन ने स्पष्ट किया कि हम केवल मौसम या बारिश के भरोसे हवा साफ होने की उम्मीद नहीं कर सकते। उन्होंने जोर दिया कि प्रदूषण को कम करने के लिए उत्सर्जन (emissions) में कटौती की स्थायी रणनीतियों की जरूरत है। हवा में प्रदूषकों की इतनी तेजी से वापसी का मुख्य कारण वाहनों का धुआं, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्य और वायुमंडल में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाएं हैं, जो नए कणों को जन्म देती हैं।

ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली की हवा की स्थिति काफी अस्थिर बनी हुई है। हाल ही में जहां एक ओर AQI 76 दर्ज किया गया, वहीं कुछ इलाकों में यह 133 तक पहुंच गया। इससे पहले 28 अक्टूबर को हवा की गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में थी और AQI 229 तक जा पहुंचा था, जबकि विवेक विहार जैसे इलाकों में यह आंकड़ा 316 के पार था। विशेषज्ञों का कहना है कि PM2.5 स्तर में 29.3% से 42.2% तक का योगदान हवा में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं का है, जो इस संकट को और अधिक जटिल बना देता है।

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