दिल्ली में एडमिशन फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़, DTU का पूर्व छात्र समेत तीन गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी एडमिशन के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें DTU का एक पूर्व छात्र मास्टरमाइंड निकला।

दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी में एडमिशन दिलाने के नाम पर अभिभावकों को ठगने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) का एक पूर्व छात्र निकला। यह गिरोह उन माता-पिता को अपना निशाना बनाता था जो अपने बच्चों के लिए नामी यूनिवर्सिटी में सीट चाहते थे।
पुलिस की कार्रवाई शाहबाद डेयरी थाने में दर्ज एक एफआईआर के बाद शुरू हुई, जिसके लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया था। जांच में सामने आया कि इस रैकेट का मुख्य आरोपी यशराज बाजपेई है, जिसने DTU से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। यशराज फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन चलाकर मासूम अभिभावकों को लुभाता था।
ठगी के इस खेल में भरोसा जीतने के लिए यशराज बड़ी चालाकी करता था। वह माता-पिता से कैफे में मिलता था या उन्हें सीधे DTU कैंपस ले जाता था। वहां वह खुद को यूनिवर्सिटी का स्टाफ बताकर उन्हें कैंपस टूर कराता था ताकि उन्हें यकीन हो जाए कि उसके पास एडमिशन कराने की पावर है।
प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन कराकर ऐंठे लाखों रुपये
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह पहले छात्रों को DTU में एडमिशन दिलाने का वादा करता था। लेकिन असल में, वे छात्रों को मैनेजमेंट कोटा के जरिए प्राइवेट कॉलेजों में डाल देते थे। जब छात्रों को उनकी पसंद की यूनिवर्सिटी नहीं मिलती थी, तो आरोपी अभिभावकों पर यह दबाव बनाते थे कि अगर उन्होंने प्राइवेट कॉलेज स्वीकार नहीं किया, तो उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी उनसे भारी कमीशन वसूलते थे।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब डॉ. कृतिका जोशी नाम की एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि उनसे करीब 8.50 लाख रुपये की ठगी की गई है। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और सर्विलांस की मदद से इस गिरोह के दो अन्य सदस्यों, युवराज और देवेंद्र सिंह को 26 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के भोपाल से गिरफ्तार किया।
फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस खेल में और कौन-कौन शामिल था और ठगी की गई रकम को कहां-कहां खर्च किया गया।