उत्तर प्रदेश: अर्नब चक्रवात से कांपी काशी, 24 घंटे में 8 डिग्री लुढ़का पारा, हवा ने बढ़ाई मुसीबत
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, बीते 24 घंटे में करीब दो मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान हवा 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली। आसमान में बादल छाए रहने और बारिश के कारण लोगों को ठिठुरन महसूस हुई। सड़कों पर कीचड़ और गंगा के 84 घाटों पर पसरी वीरानी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

वाराणसी: अर्नब चक्रवात का असर काशी में साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार सुबह चार बजे से शुरू हुई बारिश शुक्रवार सुबह तक जारी रही। लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश और तेज हवाओं ने अक्टूबर में ही ठंड का एहसास करा दिया है। महज 24 घंटे में तापमान करीब आठ डिग्री तक गिर गया। अधिकतम तापमान सामान्य से 7.2 डिग्री नीचे पहुंचकर 24.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार को यह 32.8 डिग्री था। तापमान में गिरावट के चलते सुबह सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। मौसम विभाग के अनुसार वाराणसी प्रदेश का सबसे ठंडा जिला रहा। दिन और रात के तापमान में महज तीन डिग्री का अंतर रह गया है।

2 मिलीमीटर बारिश, 30 किमी की रफ्तार से चली हवा
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, बीते 24 घंटे में करीब दो मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान हवा 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली। आसमान में बादल छाए रहने और बारिश के कारण लोगों को ठिठुरन महसूस हुई। सड़कों पर कीचड़ और गंगा के 84 घाटों पर पसरी वीरानी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार, शुक्रवार शाम से चक्रवात का असर कम होने लगेगा और मौसम धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटेगा। हालांकि, ठंडी हवाओं से सिहरन बनी रहेगी। शुक्रवार को आंधी, बिजली चमकने और बादल गरजने को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसका असर वाराणसी समेत पूर्वांचल के गाजीपुर, सोनभद्र, चंदौली और बलिया में भी देखने को मिल सकता है। शनिवार सुबह धूप निकलने से तापमान सामान्य होने की उम्मीद है।

गंगा में छोटी नावों का संचालन बंद
खराब मौसम और मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए छोटी नावों का संचालन फिलहाल बंद कर दिया है। बड़ी नावों का संचालन भी मौसम की स्थिति के अनुसार किया जा रहा है। मांझी समाज के विनोद निषाद ने बताया कि नाविकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन के अगले आदेश तक नावों का संचालन बंद रहेगा। सभी नावों को घाट किनारे सुरक्षित बांधकर रखा गया है।