हरियाणा

बुलिंग पर हाई कोर्ट सख्त: स्कूलों में एंटी-बुलिंग प्रोटोकॉल लागू करने का आदेश

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने स्कूलों में बुलिंग और उत्पीड़न रोकने के लिए सख्त प्रोटोकॉल और आंतरिक समितियां बनाने का आदेश दिया है।

Sonu Nigam· 5 Nov, 6:41 AM · 2 मिनट
बुलिंग पर हाई कोर्ट सख्त: स्कूलों में एंटी-बुलिंग प्रोटोकॉल लागू करने का आदेश

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने स्कूलों में छात्रों के साथ होने वाली बुलिंग और उत्पीड़न को रोकने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी स्कूल अब जेंडर पहचान और यौन अभिविन्यास (sexual orientation) के आधार पर होने वाले उत्पीड़न से निपटने के लिए औपचारिक तंत्र और प्रोटोकॉल स्थापित करें। यह फैसला एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आया, जिसने शिक्षा व्यवस्था में छात्रों की मानसिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

जस्टिस मनीषा बत्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को निर्देश दिया है कि वे अपने सभी संबद्ध संस्थानों में तीन महीने के भीतर आंतरिक समितियां गठित करना सुनिश्चित करें। ये समितियां विशेष रूप से बुलिंग और उत्पीड़न की शिकायतों को सुनने और उनका समाधान करने का काम करेंगी।

एक दुखद घटना ने दिलाई सुरक्षा की याद

यह पूरा मामला फरीदाबाद के एक नामी स्कूल के 16 वर्षीय छात्र की आत्महत्या से जुड़ा है, जिसने 24 फरवरी 2022 को अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। मृतक की मां आरती मल्होत्रा ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उनके बेटे को उसकी 'स्त्री जैसी आदतों' और यौन अभिविन्यास के कारण सालों तक शारीरिक, मौखिक और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। याचिका में यह भी कहा गया कि मां और एक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट द्वारा बच्चे के गिरते मानसिक स्वास्थ्य की चेतावनी देने के बावजूद, स्कूल प्रशासन और हेडमिस्ट्रेस ने इस पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बत्रा ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि सुप्रीम कोर्ट के सुकदेब सहा जनादेश और 2021 के स्कूल सुरक्षा दिशा-निर्देशों जैसे मौजूदा नियमों को अक्सर संस्थागत स्तर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कोर्ट ने सीबीएसई की उस मांग को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने खुद को इस मामले से अलग रखने की कोशिश की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि एक नियामक संस्था होने के नाते, सीबीएसई की यह जिम्मेदारी है कि वह संबद्ध स्कूलों की वार्षिक सुरक्षा रिपोर्टों की बारीकी से जांच करे ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

अब नए निर्देशों के तहत, स्कूलों को सभी शिकायतों का निपटारा तेजी से और पूरी गोपनीयता के साथ करना होगा। साथ ही, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि यदि कोई शिकायत किसी संज्ञेय अपराध (cognizable offense) से जुड़ी है, तो कानून के अनुसार उसकी सूचना तुरंत पुलिस को देना अनिवार्य होगा।

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