दिल्ली से गुवाहाटी तक दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, रेल मंत्रालय ने कॉरिडोर विस्तार को दी मंजूरी
केंद्र सरकार ने दिल्ली-सिलिगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को गुवाहाटी तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। जानें रूट और यात्रा समय की पूरी डिटेल।

देश के रेल नेटवर्क में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने प्रस्तावित दिल्ली-सिलिगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को अब गुवाहाटी तक बढ़ाने का फैसला किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस विस्तार को आधिकारिक मंजूरी दे दी है, जिससे उत्तर-पूर्व भारत की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी सुधार आएगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को इस खबर की पुष्टि की।
यह बड़ा फैसला मुख्यमंत्री सरमा द्वारा जुलाई 2026 में रेल मंत्री के साथ हुई बैठक के दौरान किए गए औपचारिक अनुरोध के बाद लिया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव 31 अक्टूबर 2026 को रखी गई थी, जब वाराणसी और नई दिल्ली के बीच वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस का उद्घाटन किया गया था।
1,500 किमी का सफर और प्रमुख शहरों का कनेक्शन
यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर लगभग 1,500 किलोमीटर लंबा होगा। यह केवल दो शहरों को नहीं, बल्कि देश के कई महत्वपूर्ण केंद्रों को एक सूत्र में पिरोएगा। इस रूट में दिल्ली के अलावा आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और पटना जैसे बड़े शहर शामिल होंगे, जिसके बाद ट्रेन सिलिगुड़ी होते हुए गुवाहाटी पहुंचेगी। सबसे खास बात यह है कि इस सेवा के शुरू होने के बाद दिल्ली से गुवाहाटी की यात्रा का समय घटकर 8 घंटे से भी कम रह जाएगा।
इस फैसले पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, "इसीलिए, मोदी कहीं नहीं जाएगा!" उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कॉरिडोर स्थानीय व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलेगा और असम को हाई-टेक औद्योगीकरण की ओर ले जाने में मदद करेगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि यह प्रोजेक्ट केवल अमीरों के लिए नहीं होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि टिकट की दरें किफायती रखी जाएंगी, जो हवाई किराए की तुलना में काफी कम होंगी, ताकि छात्र, मध्यम वर्गीय परिवार और एमएसएमई (MSME) कारोबारी इसका लाभ उठा सकें।
यह परियोजना 'मेक इन इंडिया' पहल का एक हिस्सा है। रेल मंत्री ने बताया कि इस कॉरिडोर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सभी स्ट्रक्चरल कंपोनेंट्स, जैसे कि पिलर और गर्डर, पूरी तरह से भारतीय श्रमिकों द्वारा देश में ही तैयार किए जाएंगे। यह प्रोजेक्ट देश के उन सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का हिस्सा है, जिन्हें राष्ट्रीय ब्लूप्रिंट के तहत विकसित किया जा रहा है।