नई दिल्ली: दिल्ली के शहरी विकास मंत्री श्री आशीष सूद ने आज दिल्ली सचिवालय में दिल्ली विश्वविद्यालयों के छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में एनएसएस स्वयंसेवक तथा पेइंग गेस्ट (पीजी) सुविधाओं एवं किराये के मकानों में रहने वाले छात्र शामिल थे।

सत्‍य निकेतन में हुए दुखद भवन हादसे के बाद छात्रों की जीवन-स्थितियों और सुरक्षा संबंधी मुद्दों को सीधे समझने के उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की गई। इस दौरान छात्रों ने अपने अनुभव और विभिन्न समस्याओं से मंत्री को अवगत कराया।

छात्रों की चिंताओं का जवाब देते हुए शहरी विकास मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार अगले एक से दो माह के भीतर पीजी के संबंध में व्यापक कानून एवं नियमन लेकर आएगी।

शहरी विकास मंत्री ने कहा की शहरी विकास विभाग पहले से ही पीजी नीति पर काम कर रहा था और जैसा कि मैंने आपसे पहले भी साझा किया था, कोचिंग संस्थानों के संबंध में न्यायमूर्ति गौबा समिति की रिपोर्ट को लागू करने पर भी काम चल रहा था। लेकिन यह दुखद हादसा हमें गौबा समिति की रिपोर्ट के क्रियान्वयन में तेजी लाने और ऐसी नीति बनाने के लिए प्रेरित करता है, जो सभी की चिंताओं का समाधान कर सके।

छात्र प्रतिनिधियों ने बैठक के दौरान पीजी व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परिचालन एवं बुनियादी ढांचे संबंधी समस्याओं को सामने मंत्री महोदय के साथ साझा किया।

पारदर्शिता का अभाव:

छात्रों ने एक समर्पित वेब पोर्टल बनाने की मांग की, जिस पर पीजी संचालकों के लिए किराया, भोजन व्यवस्था, उपलब्ध सुविधाओं तथा भवन की संरचनात्मक सुरक्षा संबंधी जानकारी पहले से उपलब्ध कराना अनिवार्य हो।

छात्रों ने शिकायत की कि कई मामलों में मकान मालिक किराया समझौते में तय शर्तों का पालन नहीं करते हैं।

छात्रों ने बताया कि कई संपत्ति मालिकों द्वारा मनमाने तरीके से बिजली के अधिक शुल्क वसूले जाते हैं।

सुरक्षा संबंधी मुद्दों के संबंध में

छात्रों ने मानसून से पहले सुरक्षा ऑडिट, संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाण-पत्र तथा नियमित निरीक्षण व्यवस्था की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि चूंकि किराया समझौते दो निजी पक्षों के बीच होते हैं, इसलिए सरकार ऐसे कानूनी प्रावधान की संभावना तलाश रही है, जिससे इन समझौतों को प्रभावी रूप से बाध्यकारी बनाया जा सके।

तत्काल राहत के साथ दीर्घकालिक समाधान पर जोर देते हुए शहरी विकास मंत्री ने कहा कि सरकार की रणनीति तत्काल राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक और संरचनात्मक समाधान उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

इस दिशा में निम्नलिखित प्रमुख कदमों पर विचार किया जा रहा है:

डिजिटल पोर्टल:

बाहरी छात्रों के लिए पीजी की किराया सीमा, उपलब्ध सुविधाओं और सुरक्षा ऑडिट अनुपालन का विवरण प्रदर्शित करने वाला अनिवार्य रजिस्ट्रेशन पोर्टल विकसित किया जाएगा।

हॉस्टल क्षमता में वृद्धि:

विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को परिसर में अधिक हॉस्टल बनाने की सुविधा देने के लिए एफएआर बढ़ाने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है।

वैकल्पिक छात्र आवास:

नरेला सहित खाली पड़ी सरकारी संपत्तियों और अप्रयुक्त भवनों को सुरक्षित छात्रावासों में परिवर्तित करने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। इन सुविधाओं को छात्रों के लिए सीधी बस सेवा से भी जोड़ा जा सकता है।

निजी एवं केंद्र सरकार का सहयोग:

छात्र आवास की कमी को दूर करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा केंद्र सरकार से सहायता लेने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार ने छात्रों के लिए सुरक्षित, संरक्षित और पढ़ाई के अनुकूल आवासीय वातावरण उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। श्री सूद ने कहा की हमने अभी इन युवा छात्रों से मुलाकात की है। इसके बाद हम पीजी प्रबंधन, अभिभावकों और नागरिक एजेंसियों से भी बात करेंगे, ताकि पानी, नगर निगम और बिजली विभाग से संबंधित उनकी चिंताओं को समझा जा सके और यह तय किया जा सके कि इन व्यवस्थाओं को किस प्रकार प्रभावी ढंग से विनियमित किया जाए।

उन्होंने बताया कि इस विषय पर दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता की संयुक्त अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक में भी चर्चा हो चुकी है।

मंत्री महोदय ने कहा की मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के साथ आगे की चर्चा तथा मंत्रिमंडल में विचार-विमर्श के बाद, सभी हितधारकों से परामर्श करके मेरा विश्वास है कि हम इस नीति को जनता के समक्ष लाएंगे और अगले एक से डेढ़ माह के भीतर इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

‘पेइंग गेस्ट आवास विनियमन एवं सुरक्षा विधेयक, 2026’ का प्रस्ताव

मंत्री ने प्रस्तावित “पेइंग गेस्ट आवास विनियमन एवं सुरक्षा विधेयक, 2026” के बारे में भी जानकारी दी। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य पीजी संचालन के लिए अनिवार्य लाइसेंस, जोनवार किराया सीमा, संरचनात्मक एवं अग्नि सुरक्षा ऑडिट तथा एक केंद्रीय ‘GovPG’ पोर्टल की व्यवस्था करना है।

छात्रों और मीडिया प्रतिनिधियों को यह भी बताया गया कि उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय संयुक्त समीक्षा बैठकों में दक्षिणी परिसर (South Campus), मुखर्जी नगर सहित दिल्ली के प्रमुख छात्र क्षेत्रों में एक सप्ताह के भीतर कड़े संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने तथा हॉस्टल के लिए एफएआर सीमा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

विपक्ष की आलोचना पर मंत्री का पलटवार

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री श्री आशीष सूद ने इस दुखद घटना का राजनीतिकरण करने को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि सत्‍य निकेतन घटना को लेकर अफवाहें फैलाने वाले आम आदमी पार्टी के नेता केवल सनसनी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने ऐसे नेताओं को “स्वघोषित बेरोजगार नेता” करार दिया। उन्होंने कहा कि पांच साल बाद जनता स्वयं तय करेगी कि ऐसे नेताओं की वास्तविक स्थिति क्या है।

मंत्री ने दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि व्यवस्थित सुधार, छात्र सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।