देश की राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर सुप्रीम कोर्ट आज यानी 22 अगस्त को अहम फैसला सुनाने जा रहा है। यह फैसला तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ — न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की ओर से सुबह 10:30 बजे सुनाया जाएगा। अदालत का यह फैसला तय करेगा कि क्या आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजा जाएगा या वे पहले की तरह सड़कों पर रहेंगे।

मामला कहां से शुरू हुआ?

यह विवाद सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली-NCR के संवेदनशील इलाकों से कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखा जाए। इस आदेश के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गईं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह आदेश पशु अधिकारों के खिलाफ है और व्यावहारिक रूप से लागू करना मुश्किल है। इसी के चलते मामला तीन जजों की विशेष पीठ को सौंपा गया।

डॉग बाइट के बढ़ते मामले

सरकारी आंकड़े इस समस्या की गंभीरता दिखाते हैं। वर्ष 2024 में देशभर में 37.15 लाख डॉग बाइट केस दर्ज हुए, यानी हर दिन औसतन 10 हजार लोग इसका शिकार हुए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट बताती है कि 2023 में 305 लोगों की मौत कुत्तों के काटने से हुई। ऐसे में यह मुद्दा केवल पशु कल्याण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा का बड़ा सवाल बन चुका है।

सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को कुछ कड़े दिशा-निर्देश दिए थे, जिनमें शामिल हैं:

  • आवारा कुत्तों को संवेदनशील इलाकों से हटाकर शेल्टर होम में रखा जाए।

  • पकड़े गए कुत्तों का रिकॉर्ड, टीकाकरण और नसबंदी अनिवार्य हो।

  • शेल्टर होम की स्थिति पर दो महीने में रिपोर्ट पेश की जाए।

  • CCTV निगरानी हो ताकि कोई कुत्ता बाहर न निकल पाए।

  • अभियान में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।

कोर्ट का संतुलित नजरिया

सुनवाई के दौरान पीठ ने साफ कहा कि अदालत जानवरों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील है, लेकिन मानव जीवन और सुरक्षा सर्वोपरि है। कोर्ट का प्रयास है कि ऐसा रास्ता निकले जिससे न तो इंसानों की जान खतरे में हो और न ही जानवरों के अधिकारों का हनन।

22 अगस्त का महत्व

आज का दिन सिर्फ दिल्ली-NCR ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने वाले समय की नीतियों और कानूनों को तय कर सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत आवारा कुत्तों को लेकर सख्त रुख अपनाती है या पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए नरम रवैया अपनाती है।