बिहार सरकार का बड़ा फैसला: 6 और यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों की शक्तियां सीमित
बिहार सरकार ने 6 और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नीति निर्धारण की शक्तियां छीनीं, अब 10 यूनिवर्सिटीज के लिए एक साथ होगी नियुक्ति।

बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने छह और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (Vice-Chancellors) की नीति निर्धारण की शक्तियों पर पाबंदी लगा दी है। लोक भवन द्वारा जारी इस आदेश के बाद अब इन विश्वविद्यालयों के कुलपति स्वतंत्र रूप से नीतियां नहीं बना पाएंगे। यह कदम उन विश्वविद्यालयों के लिए उठाया गया है जहां के कुलपतियों का कार्यकाल जनवरी 2027 में समाप्त होने वाला है।
सरकार के इस नए आदेश का असर ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी (LNMU) दरभंगा, भूपेंद्र नारायण मंडल यूनिवर्सिटी (BNMU) मधेपुरा, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत यूनिवर्सिटी (KSDSU) दरभंगा, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार यूनिवर्सिटी (BRABU) मुजफ्फरपुर, जय प्रकाश यूनिवर्सिटी (JPU) छपरा और आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी (AKU) पटना पर पड़ेगा।
अब 10 विश्वविद्यालयों के लिए एक साथ होगी नियुक्ति
गौरतलब है कि इससे पहले भी लोक भवन ने तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी (TMBU), वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी (VKSU) आरा, मगध यूनिवर्सिटी और मौलाना मजहरुल हक अरबी और फारसी यूनिवर्सिटी के कुलपतियों की शक्तियों को सीमित किया था। अब इन सभी को मिलाकर कुल 10 विश्वविद्यालयों के लिए नए कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया एक साथ संचालित की जाएगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हाल ही में शामिल किए गए छह विश्वविद्यालयों के लिए उम्मीदवारों को अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार उन 8,000 से अधिक आवेदनों का उपयोग करेगी, जो पहले चार विश्वविद्यालयों की भर्ती प्रक्रिया के दौरान जमा किए गए थे।
पूर्व भुस्टा अध्यक्ष प्रो. डी.एन. राय और अन्य आवेदकों के अनुसार, इस एकीकृत प्रक्रिया से चयन की समयसीमा एक समान हो जाएगी। साथ ही, सरकार पारंपरिक तरीके से हटकर काम कर सकती है, जिसमें चयनित उम्मीदवारों को उन विश्वविद्यालयों में भी नियुक्त किया जा सकता है, जिनके लिए उन्होंने मूल रूप से आवेदन नहीं किया था। पूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सरकार आपसी विचार-विमर्श के जरिए तय करेगी कि किस कुलपति को किस यूनिवर्सिटी की जिम्मेदारी सौंपी जाए।