पीएम-प्रणाम योजना: कटिहार में डीडीसी ने किसानों को दिया आधुनिक खेती का मंत्र, संतुलित खाद पर जोर
कटिहार में पीएम-प्रणाम योजना के तहत किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और नैनो यूरिया अपनाने की सलाह दी गई ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे।

बिहार के कटिहार जिले में खेती को टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की बड़ी पहल हुई है। मृदा स्वास्थ्य को बचाने और रासायनिक खादों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इफको और जिला कृषि विभाग ने मिलकर 'पीएम-प्रणाम' योजना के तहत विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। मकसद साफ था। किसानों को समझाना कि कम लागत और सही तकनीक से जमीन की उपजाऊ शक्ति बचाते हुए बेहतर पैदावार कैसे ली जा सकती है।
पीएम-प्रणाम केंद्र सरकार की योजना है, जिसका पूरा नाम 'पीएम प्रोग्राम फॉर रेस्टोरेशन, अवेयरनेस, नरिशमेंट एंड अमेलियोरेशन ऑफ मदर अर्थ' है। इसका लक्ष्य रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल घटाना और वैकल्पिक खादों को बढ़ावा देना है। जो राज्य खपत कम करते हैं, उन्हें उर्वरक सब्सिडी में हुई बचत का 50 फीसदी हिस्सा अनुदान के रूप में मिलता है।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि उप विकास आयुक्त (डीडीसी) डॉ. नेहा कुमारी (आईएएस), जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार और इफको बिहार के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ. आनंद कुमार श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलित कर की।
डीडीसी डॉ. नेहा कुमारी ने किसानों से अपील की कि वे पुरानी पद्धतियों को छोड़कर आधुनिक और स्वदेशी कृषि तकनीकों को अपनाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की खेती पूरी तरह टिकाऊ खेती पर निर्भर करेगी। कृषि अधिकारियों को भी निर्देश मिला कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को इस योजना के फायदों से जोड़ें।
मिट्टी की जांच और नैनो उर्वरकों का महत्व
जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने किसानों को बेहद जरूरी सलाह दी। अपनी मर्जी से खाद डालने के बजाय पहले मिट्टी की जांच कराएं, फिर वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर ही रासायनिक या जैव उर्वरकों का इस्तेमाल करें। इससे अनावश्यक खर्च तो घटेगा ही, खेतों की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।
वहीं इफको के डॉ. आनंद कुमार श्रीवास्तव ने नैनो उर्वरकों की ताकत समझाई। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसी नई तकनीकों के इस्तेमाल का सही तरीका और निर्धारित मात्रा भी उन्होंने बताई। विभागीय अधिकारियों से उनका आग्रह था कि ये तकनीकें हर किसान तक पहुंचें, ताकि खेती में आधुनिकता आए।
नैनो यूरिया तरल रूप में आता है और इसकी एक बोतल पारंपरिक यूरिया की एक बोरी के बराबर असर देने का दावा किया जाता है।
संगोष्ठी का समापन 'स्वस्थ मिट्टी, संतुलित उर्वरक उपयोग और समृद्ध किसान' के संकल्प के साथ हुआ। वैकल्पिक खादों के प्रयोग पर गहन चर्चा भी हुई। जिले भर से आए प्रगतिशील किसानों के साथ प्रखंड कृषि पदाधिकारी और कृषि समन्वयक भी मौजूद रहे।