स्कॉलरशिप फ्रॉड: दिल्ली पुलिस ने दो जालसाजों को दबोचा, 54 हजार लोगों का डेटा मिला
दिल्ली पुलिस ने तमिलनाडु के व्यक्ति से स्कॉलरशिप के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

दिल्ली की ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय स्कॉलरशिप फ्रॉड स्कैम का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला तमिलनाडु के एक निवासी के साथ हुई ठगी से जुड़ा है, जिसे उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप दिलाने का झांसा देकर पैसे लूटे गए थे। पुलिस ने इस मामले में सचिन शर्मा और सुमित नाम के दो युवकों को पकड़ा है, जो ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए 'म्यूल अकाउंट' का इस्तेमाल कर रहे थे।
घटना की शुरुआत तब हुई जब तमिलनाडु के रहने वाले मुथु कुमार ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि 1 सितंबर 2026 को उन्हें स्कॉलरशिप का लालच दिया गया और उनसे 17,989 रुपये ठग लिए गए। इस शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और बैंक ट्रांजैक्शन के साथ-साथ एटीएम के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम ईस्ट दिल्ली के एक एटीएम से निकाली गई थी, जिससे सचिन शर्मा की पहचान हुई।
कमीशन के चक्कर में बहन का एटीएम कार्ड दिया
पुलिस ने 17 अक्टूबर को खिचड़ीपुर निवासी 29 वर्षीय सचिन शर्मा को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सचिन ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि उसने कमीशन के लालच में अपनी बहन का एटीएम कार्ड और यूपीआई एक्सेस अपने साथी सुमित को दे दिया था। सचिन का दावा है कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह पैसा किसी धोखाधड़ी से आया है। इसके बाद पुलिस ने 21 अक्टूबर को त्रिलोकपुरी निवासी सुमित को भी गिरफ्तार कर लिया।
सुमित से पूछताछ के दौरान इस घोटाले की एक बड़ी साजिश सामने आई। उसने बताया कि 6 अगस्त 2026 को एक महिला ने उसे लगभग 54,000 लोगों का एक कॉन्टैक्ट डेटाबेस उपलब्ध कराया था। इसी महिला ने उसे ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए बैंक अकाउंट मुहैया कराने का निर्देश दिया था। पुलिस ने सुमित के पास से वह मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया है जिसमें 54 हजार लोगों की जानकारी मौजूद थी, जिसमें शिकायतकर्ता मुथु कुमार का नाम भी शामिल था।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(2) और 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल साइबर सेल उस रहस्यमयी महिला और उसके अन्य साथियों की तलाश कर रही है जिन्होंने इस पूरे नेटवर्क को संचालित किया। पुलिस डिजिटल सबूतों और बैंकिंग रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।