दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए निर्माण कार्य पर रोक, हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए निर्माण कार्यों पर पाबंदी लगाई गई है, जिससे हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है।

सर्दियों के आते ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने एक बार फिर कड़े कदम उठाए हैं। इस बार प्रदूषण रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों का सीधा असर उन हजारों मजदूरों पर पड़ने वाला है, जो निर्माण कार्यों से अपनी आजीविका चलाते हैं। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण प्रतिबंध के कारण अब निर्माण कार्यों पर रोक लग गई है, जिससे मजदूरों की दिहाड़ी छिनने का खतरा पैदा हो गया है।
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने आदेश दिया है कि 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक पूरे एनसीआर में धूल उड़ाने वाले किसी भी तरह के विध्वंस और बाहरी निर्माण कार्य पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, अस्पताल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रोजेक्ट्स को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। वहीं, दिल्ली सरकार के विंटर एक्शन प्लान के मुताबिक, 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाली सिविल निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी, जिसमें 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच का समय सबसे सख्त फ्रीज पीरियड होगा।
मजदूरों के पलायन और रोजगार पर गहरा असर
कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के अचानक बंद होने वाले कामों से रोजगार में अस्थिरता आती है। जब प्रवासी मजदूर काम न मिलने के कारण अपने राज्यों की ओर लौट जाते हैं, तो उन्हें दोबारा बुलाने में तीन महीने तक का समय लग सकता है, जिससे प्रोजेक्ट्स में देरी होती है और मजदूरों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। यूनिटी ग्रुप के चीफ कमर्शियल ऑफिसर कुणाल बेहरानी के अनुसार, बिल्डर्स अब नवंबर की डेडलाइन से पहले काम पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि सर्दियों के बीच में काम पूरी तरह ठप हो जाएगा।
प्रदूषण से लड़ने की यह जंग सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। CAQM ने दिल्ली और उसके आसपास के पांच जिलों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर—के सरकारी और निजी कार्यालयों को 5 नवंबर से 20 नवंबर तक केवल 50% फिजिकल अटेंडेंस रखने का निर्देश दिया है, बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करना होगा। दिल्ली सरकार ने भी 1 नवंबर से 50% वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य कर दिया है।
इसके अलावा, 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड गैर-BS-VI वाहनों पर पाबंदी लगाई गई है। अधिकृत पार्किंग स्थलों पर 28 फरवरी तक डबल पार्किंग शुल्क वसूला जाएगा और पीयूसीसी (PUCC) सर्टिफिकेट की सख्ती से जांच की जाएगी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने साफ कर दिया है कि इन प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी जाएगी, क्योंकि पिछले सालों का डेटा बताता है कि नवंबर में हवा की रफ्तार कम होने से वायु गुणवत्ता 'गंभीर' और 'अति गंभीर' श्रेणी में पहुंच जाती है। हालांकि अक्टूबर में दिल्ली की हवा एक दशक के बाद सबसे साफ रही, लेकिन प्रशासन आने वाले खतरे को देखते हुए पहले से ही सतर्क है।