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जामिया मिलिया इस्लामिया में 18 दिन चला विरोध प्रदर्शन खत्म, प्रशासन ने दी छात्र संघ बहाली की मंजूरी

जामिया मिलिया इस्लामिया में स्टूडेंट्स यूनियन की बहाली पर सहमति बनने के बाद 18 दिनों से चल रहा छात्रों का विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया है।

Sonu Nigam· 31 Oct, 1:06 PM · 2 मिनट
जामिया मिलिया इस्लामिया में 18 दिन चला विरोध प्रदर्शन खत्म, प्रशासन ने दी छात्र संघ बहाली की मंजूरी

दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पिछले 18 दिनों से जारी छात्रों का जोरदार विरोध प्रदर्शन आखिरकार खत्म हो गया है। गुरुवार देर रात यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच करीब सात घंटे तक चली लंबी और गहन बातचीत के बाद यह सहमति बनी। विवाद की मुख्य वजह छात्र संघ (JMISU) की बहाली थी, जिस पर प्रशासन ने अब एक निश्चित समय सीमा तय कर दी है, जिसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिज़वी ने रात करीब 11 बजे एक आधिकारिक आदेश जारी किया। इस आदेश के मुताबिक, जामिया मिलिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) के संविधान को मंजूरी देने और उसे लागू करने के लिए 15 मई, 2027 की डेडलाइन तय की गई है। इतना ही नहीं, प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह हफ्ते के भीतर छात्र संघ के चुनाव कराए जाएंगे। उम्मीद है कि नया सत्र 15 जुलाई, 2027 से शुरू होगा और चुनाव लिंगदोह कमेटी के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित किए जाएंगे।

25 साल बाद लौटेंगे कैंपस में चुनाव

कुलपति प्रोफेसर मज़हर आसिफ ने इस मौके पर बताया कि यूनिवर्सिटी में आखिरी बार सही तरीके से चुनाव करीब 25 साल पहले हुए थे। साल 2006 में आंतरिक विवादों और हंगामे के कारण चुनाव प्रक्रिया को रोक दिया गया था। अब इस नए समझौते के साथ कैंपस में फिर से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वापसी होगी।

छात्रों को राहत देते हुए प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन के दौरान निलंबित किए गए छात्रों के निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस (Show-cause notice) वापस लेने का फैसला किया है। साथ ही, विरोध के दौरान सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच के लिए एक विशेष कमेटी बनाने का वादा भी किया गया है। यूनिवर्सिटी ने घोषणा की है कि कैंपस में ऑफलाइन कक्षाएं और अन्य गतिविधियां 10 नवंबर, 2026 से फिर से शुरू हो जाएंगी।

इस पूरे विवाद को सुलझाने में राज्यसभा सांसद हारिस बीरन ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मध्यस्थता करते हुए कहा कि यह समाधान दोनों पक्षों की जरूरत थी क्योंकि प्रशासन और छात्र, दोनों ही भारी दबाव में थे। इस बातचीत में MSF, AISA, NSUI, SFI, फ्रेटरनिटी मूवमेंट और दिशा जैसे कई छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया, जबकि पीएचडी छात्र जिहाद ने छात्रों के मुख्य प्रतिनिधि के रूप में बात की।

बता दें कि इस आंदोलन के दौरान तनाव काफी बढ़ गया था। रिदा नौशाद खान, एबिन बेसिल, रेहान, अबुज़र गौर और ऋतिक जैसे छात्रों ने भूख हड़ताल की थी। इससे पहले 26 और 27 अक्टूबर को भी बातचीत की कोशिश की गई थी, लेकिन समय सीमा तय न होने के कारण बात नहीं बनी थी, जिसके चलते कैंपस में अर्धसैनिक बलों और छात्रों के बीच झड़पें भी हुई थीं।

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