MCD का बड़ा फैसला: बीमारियों से लड़ने के लिए 1066 स्टाफ की भर्ती और 923 करोड़ का सफाई प्रोजेक्ट मंजूर
MCD ने बीमारियों से लड़ने के लिए 1066 स्टाफ की भर्ती और धूल प्रदूषण रोकने के लिए 923.6 करोड़ के सफाई प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।
दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शहर की सेहत और सफाई को बेहतर बनाने के लिए दो बड़े फैसलों पर मुहर लगाई है। एमसीडी की स्थायी समिति ने एक तरफ जहां डेंगू और मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों पर लगाम लगाने के लिए 1,066 नए कर्मचारियों की भर्ती को मंजूरी दी है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की सड़कों से धूल और प्रदूषण कम करने के लिए 923.6 करोड़ रुपये के एक मेगा स्वीपिंग प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है।
बीमारियों से निपटने के लिए की जा रही इस भर्ती के तहत कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर स्टाफ लिया जाएगा। इसमें 14 एंटी-मलेरिया ऑफिसर, 105 मलेरिया इंस्पेक्टर, 398 असिस्टेंट मलेरिया इंस्पेक्टर और 549 एमटीएस (पब्लिक हेल्थ) के पद शामिल हैं। इन कर्मचारियों की मुख्य जिम्मेदारी शहर के संवेदनशील इलाकों में निरीक्षण करना, मच्छरों के पनपने वाली जगहों को खत्म करना और फॉगिंग जैसे जरूरी अभियान चलाना होगा। स्थायी समिति की चेयरपर्सन सत्य शर्मा ने स्पष्ट किया है कि बीमारियों की निगरानी और लोगों को जागरूक करने के लिए फील्ड ऑपरेशन बेहद जरूरी हैं, इसलिए भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदूषण कम करने के लिए सड़कों पर उतरेंगी 70 मशीनें
दिल्ली में बढ़ते धूल प्रदूषण से निपटने के लिए एमसीडी ने 70 मैकेनिकल रोड-स्वीपिंग मशीनों की तैनाती का फैसला किया है। यह प्रोजेक्ट 10 साल के ऑपरेशन और मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के तहत चलेगा, जिसे तीन अलग-अलग पैकेज में बांटा गया है:
- पैकेज 1: लायन सर्विसेज लिमिटेड को 29 मशीनों के लिए 369.53 करोड़ रुपये का काम मिला है।
- पैकेज 2: जीए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और वीएन इंजीनियरिंग कंपनी के कंसोर्टियम को 28 मशीनों के लिए 368.83 करोड़ रुपये का ठेका मिला है।
- पैकेज 3: जेएस एनवायरो सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 13 मशीनों के लिए 185.20 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट दिया गया है।
खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में छोटी इलेक्ट्रिक मशीनों के साथ-साथ बड़े मॉडल भी शामिल होंगे, जो बिजली या सीएनजी से चलेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य सड़कों पर जमा धूल को हटाकर हवा में घुलने वाले पार्टिकुलेट मैटर (PM) को कम करना है, ताकि दिल्लीवासियों को सांस लेने में आसानी हो सके।