दिल्ली में बढ़ा पैरानॉर्मल टूरिज्म का क्रेज, अब सालभर डराने वाले अनुभवों की तलाश में लोग
दिल्ली के लोग अब सिर्फ हैलोवीन पर नहीं, बल्कि सालभर हॉरर और पैरानॉर्मल टूरिज्म का लुत्फ उठा रहे हैं। जानें क्या है यह नया ट्रेंड।

देश की राजधानी दिल्ली में अब डर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक लाइफस्टाइल और टूरिज्म का हिस्सा बन गया है। दिल्ली के लोग अब केवल हैलोवीन जैसे मौकों पर ही नहीं, बल्कि पूरे साल पैरानॉर्मल गतिविधियों और हॉरर थीम वाले मनोरंजन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस बढ़ते क्रेज का सबसे बड़ा उदाहरण 'हॉररकॉन इंडिया 2026' (HorrorCon India 2026) है, जिसका आयोजन ओखला के एनएसआईसी ग्राउंड्स में किया गया।
दो दिनों तक चले इस फेस्टिवल में लोगों ने हॉन्टेड हाउस, गेमिंग, लाइव परफॉरमेंस और डरावनी फिल्मों की स्क्रीनिंग का लुत्फ उठाया। इस इवेंट को रमन भल्ला (TMV) और दिव्य अग्रवाल (खूनी मंडे) ने मिलकर ऑर्गनाइज किया था, जिसने यह साबित कर दिया कि दिल्ली में हॉरर कल्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है।
ऐतिहासिक स्मारकों पर 'हॉन्टेड वॉक्स' का बढ़ा आकर्षण
सिर्फ इवेंट्स ही नहीं, बल्कि दिल्ली की पुरानी इमारतों और किलों में 'हॉन्टेड वॉक्स' का चलन भी काफी बढ़ गया है। 'एनरूट इंडियन हिस्ट्री' और 'अनज़िप दिल्ली' जैसे संगठन लोगों को शहर के उन ऐतिहासिक स्मारकों पर ले जा रहे हैं, जो अपनी डरावनी कहानियों के लिए मशहूर हैं। एनरूट इंडियन हिस्ट्री की क्यूरेटर अनुष्का जैन बताती हैं कि सामान्य हेरिटेज टूर के मुकाबले इन डरावनी सैर पर आने वाले लोगों की संख्या कहीं ज्यादा होती है। जमाली-कमाली और फिरोज शाह कोटला किले जैसे स्थानों पर लोग अक्सर अजीबोगरीब अहसासों का अनुभव करने का दावा करते हैं, जिन्हें जिन्न की कहानियों से जोड़ा जाता है।
वहीं, अनज़िप दिल्ली के संस्थापक और मानवविज्ञानी मोहम्मद अनस 2021 से स्थानीय लोककथाओं और ऐतिहासिक किंवदंतियों को एक्सप्लोर करने के लिए ऐसी वॉक्स आयोजित कर रहे हैं। हालांकि, इस ट्रेंड के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। दिल्ली पुरातत्व विभाग ने मालचा महल और भुली भटियारी का महल जैसे कई स्थलों को स्थायी रूप से बंद कर दिया है, जबकि अन्य साइट्स शाम 7 बजे बंद हो जाती हैं।
बढ़ती मांग को देखते हुए दिल्ली टूरिज्म ने मार्च 2026 में फिरोज शाह कोटला में 'हॉन्टेड हेरिटेज वॉक्स' की शुरुआत की है। ये सरकारी मान्यता प्राप्त टूर 25 या उससे अधिक लोगों के समूह के लिए उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 500 रुपये प्रति व्यक्ति है और ये रात 8:30 बजे तक चलते हैं।
हालांकि, सभी विशेषज्ञ इस ट्रेंड से खुश नहीं हैं। हेरिटेज क्यूरेटर शाह उमैर का मानना है कि अलौकिक कहानियों पर ज्यादा जोर देने से स्मारकों का वास्तविक ऐतिहासिक महत्व कम हो सकता है। उनका कहना है कि 80 के दशक में जमाली-कमाली जैसी जगहों पर भूतिया अफवाहें शायद इसलिए फैलाई गई थीं ताकि लोग इन सुनसान खंडहरों में अवैध गतिविधियां न करें।
इस बीच, हॉरर फिल्मों का क्रेज भी चरम पर है। 'खतरनाक फिल्म्स' की तारा ने इस साल 23 हॉरर स्क्रीनिंग आयोजित की हैं, जिसमें वसंत कुंज के सोशल में 'भूतफ्लिक्स नाइट' जैसे इवेंट्स शामिल रहे। इसके अलावा, दिल्ली लोकल गाइड्स जैसे समूह भी महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क जैसी जगहों पर फोटोग्राफी और शहर की रहस्यमयी कहानियों पर चर्चा करते नजर आते हैं।