दशहरा अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की जीत का पर्व: राष्ट्रपति मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए इस पर्व के गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला है। दिल्ली के द्वारका सेक्टर 10 स्थित श्री रामलीला कमेटी के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि दशहरा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है।
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने भगवान श्री राम को मर्यादा और नैतिक आचरण का साक्षात स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि भारत और विदेशों में आयोजित होने वाली रामलीलाएं करोड़ों लोगों को भगवान राम के जीवन के उच्च आदर्शों पर विचार करने का अवसर प्रदान करती हैं। इस अवसर पर उन्होंने पारंपरिक रूप से रावण दहन की प्रक्रिया में भी हिस्सा लिया।
प्रकृति प्रेम और सामाजिक समानता का संदेश
राष्ट्रपति ने रामायण के जरिए पर्यावरण संरक्षण की बात करते हुए कहा कि इस महाकाव्य में जल और वायु की शुद्धता, वनस्पतियों की सुंदरता और पशु-पक्षियों व मनुष्यों के बीच के गहरे संबंध को बहुत महत्व दिया गया है। उन्होंने जटायु, जामवंत और काक भुशुंडी जैसे पात्रों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे प्रकृति के हर छोटे-बड़े जीव का सम्मान करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नदियों, झीलों और जंगलों की रक्षा करना हमारे संविधान में भी एक मौलिक कर्तव्य के रूप में दर्ज है।
सामाजिक सद्भाव पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने भगवान राम और निषाद राज की मित्रता तथा माता शबरी के जूठे बेरों को स्वीकार करने के प्रसंग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं बहुत ही सरलता के साथ समानता, स्नेह और सामाजिक एकता का संदेश देती हैं। साथ ही उन्होंने संत कबीर और संत रविदास जैसे समाज सुधारकों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी 'राम' के नाम में ही परम सत्य को खोजा।
कार्यक्रम के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री परवेश साहिब सिंह और द्वारका श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आकाश गहलोत सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे। राष्ट्रपति ने कमेटी के सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे हजारों लोगों के बीच रामायण की प्रस्तुति देकर सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रख रहे हैं।