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देश की राजधानी मे रावण के साथ फुका गया 30 फुट कॉकरोच का पुतला

Sonu Nigam· 21 Oct, 8:21 AM · 2 मिनट
 देश की राजधानी मे रावण के साथ फुका गया 30 फुट कॉकरोच का पुतला

देश की राजधानी दिल्ली में दशहरा उत्सव के बाद एक अजीबोगरीब विवाद खड़ा हो गया है। मामला पीतमपुरा के नेताजी सुभाष प्लेस स्थित डीडीए ग्राउंड का है, जहां श्री केशव रामलीला समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के साथ-साथ एक 30 फुट ऊंचे कॉकरोच के पुतले को भी फूंका गया। इस घटना के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने कड़ा ऐतराज जताया है और आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस मामले को लेकर उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि इस कार्यक्रम के आयोजकों, विशेष रूप से समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक कुमार सेवरहा और मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। भारद्वाज का आरोप है कि धार्मिक मंच का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया गया है और कॉकरोच का पुतला जलाना सनातन परंपराओं का अपमान है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया, तो पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।

स्वच्छता का प्रतीक या राजनीतिक वार?

इस पूरे विवाद पर जब प्रतिक्रियाएं आईं, तो दोनों पक्षों के तर्क बिल्कुल अलग थे। दिल्ली मंत्री कपिल मिश्रा, जिन्होंने इस पुतले को जलाने में हिस्सा लिया था, ने पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग इस बात से आहत हैं, वे राष्ट्रीय राजनीति के 'दीमक' हैं। वहीं, श्री केशव रामलीला समिति और विधायक अशोक कुमार सेवरहा ने सफाई देते हुए कहा कि कॉकरोच का पुतला किसी राजनीतिक संदेश के लिए नहीं, बल्कि गंदगी के प्रतीक के रूप में जलाया गया था। उनका दावा है कि यह 'स्वच्छ भारत' और 'स्वच्छ दिल्ली' अभियान को बढ़ावा देने की एक कोशिश थी।

दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने भी अपनी एंट्री मारी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस घटना के लिए आयोजकों को "मुफ्त प्रचार" देने के लिए धन्यवाद दिया है। वहीं, पार्टी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की इतनी आक्रामक प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि वे अंदर से घबराए हुए हैं। फिलहाल, 20 और 21 अक्टूबर को दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद यह मामला राजनीतिक जंग का रूप ले चुका है।

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