शिकोहपुर लैंड डील केस: ED को राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिया 3 हफ्ते का समय, रॉबर्ट वाड्रा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुए शामिल
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शिकोहपुर लैंड डील मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED को दस्तावेज जमा करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शिकोहपुर लैंड डील मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी राहत दी है। शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान स्पेशल जज (CBI) शिवाली बंसल ने ED को उन दस्तावेजों की सूची जमा करने के लिए तीन हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया है, जिनका इस्तेमाल चार्जशीट में नहीं किया गया है। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान रॉबर्ट वाड्रा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए।
यह मामला काफी पुराना और पेचीदा है, जिसकी जड़ें सितंबर 2018 में गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR से जुड़ी हैं। मामला शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ जमीन की खरीद-फरोख्त से संबंधित है। ED का आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटलिटी प्राइवेट लिमिटेड' ने 12 फरवरी 2008 को 'ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड' से 7.5 करोड़ रुपये में यह जमीन धोखाधड़ी से हासिल की थी। एजेंसी का दावा है कि रजिस्ट्रेशन के समय जो घोषणा की गई थी, वह पूरी तरह गलत थी।
करोड़ों के मुनाफे और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, जिस जमीन को 7.5 करोड़ रुपये में खरीदा गया था, उसे बाद में सितंबर 2012 में DLF को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। इस सौदे से हुए भारी मुनाफे को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया है। ED ने इस मामले में रॉबर्ट वाड्रा, स्काईलाइट हॉस्पिटलिटी, सत्यनंद यजी, केवल सिंह विर्क और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज सहित कुल 11 संस्थाओं और व्यक्तियों को नामजद कर चार्जशीट दाखिल की है।
सुनवाई के दौरान ED की ओर से सीनियर एडवोकेट जोहेब हुसैन, स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नवीन कुमार मट्टा और एडवोकेट मोहम्मद फैजान ने पैरवी की। रॉबर्ट वाड्रा, जिन्हें 16 मई को जमानत मिली थी, इस जांच के केंद्र में हैं क्योंकि ED उन्हें संबंधित कंपनियों का मुख्य निदेशक और बड़ा शेयरधारक मानती है। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 के लिए तय की है।