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शिकोहपुर जमीन सौदा मामला: रॉबर्ट वाड्रा केस में ED को कोर्ट ने दिया 3 हफ्ते का समय

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शिकोहपुर जमीन सौदा मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED को दस्तावेजों की सूची दाखिल करने के लिए 3 हफ्ते का समय दिया है।

Sonu Nigam· 31 Oct, 1:06 PM · 2 मिनट
शिकोहपुर जमीन सौदा मामला: रॉबर्ट वाड्रा केस में ED को कोर्ट ने दिया 3 हफ्ते का समय

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुग्राम के शिकोहपुर जमीन सौदा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने एजेंसी को उन दस्तावेजों की सूची दाखिल करने के लिए 3 हफ्ते का समय दिया है, जिनका इस्तेमाल चार्जशीट में नहीं किया गया था। इस मामले में रॉबर्ट वाड्रा को आरोपी बनाया गया है, जो फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान वाड्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

विशेष न्यायाधीश (CBI) शिवाली बंसल ने मामले की सुनवाई करते हुए ED को दस्तावेजों की सूची सौंपने का निर्देश दिया और अब अगली सुनवाई 10 दिसंबर को तय की है। कोर्ट में ED की ओर से विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार मत्ता और वकील मोहम्मद फैजान पेश हुए, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पैरवी की।

DLF की भूमिका और मामले की गहराई

इस पूरे मामले में DLF कंपनी की भूमिका की जांच अभी भी जारी है। ED ने कोर्ट को बताया कि वह DLF की भूमिका पर स्टेटस रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसके लिए उसे और समय चाहिए। इससे पहले 21 अगस्त और 10 जुलाई को भी एजेंसी ने कोर्ट को सूचित किया था कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इसके अलावा, ED ने एक जमीन के दस्तावेज का अनुवाद प्रमाण पत्र भी दाखिल किया है, जो मूल रूप से गुजराती भाषा में था।

ED के आरोपों के मुताबिक, रॉबर्ट वाड्रा उन आरोपी फर्मों के मुख्य शेयरधारक और निदेशक थे, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर जमीन का सौदा किया। एजेंसी का दावा है कि एक फर्जी सेल डीड के जरिए 58 करोड़ रुपये की 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime) generated हुई, जिसे वाड्रा की संस्थाओं के जरिए घुमाया गया।

यह पूरा विवाद गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ जमीन की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि यह जमीन बिना वास्तविक भुगतान के एक फर्जी सेल डीड के जरिए खरीदी गई थी। ED का दावा है कि यह जमीन एक तरह की रिश्वत थी, ताकि तत्कालीन नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव से हाउसिंग लाइसेंस प्राप्त किया जा सके। इस मामले की शुरुआत 2018 में खेड़की दौला पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से हुई थी, जिसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था।

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