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यमुना रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट: साबरमती मॉडल अपनाने पर विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, कहा- बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा

दिल्ली सरकार साबरमती की तर्ज पर यमुना रिवरफ्रंट बनाना चाहती है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे खतरनाक बताते हुए जल शक्ति मंत्री को पत्र लिखा है।

Sonu Nigam· 31 Oct, 1:07 PM · 2 मिनट
यमुना रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट: साबरमती मॉडल अपनाने पर विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, कहा- बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा

दिल्ली सरकार राजधानी की यमुना नदी के किनारे 52 किलोमीटर लंबे रिवरफ्रंट विकसित करने की तैयारी में है, लेकिन इस योजना ने पर्यावरण विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर दिल्ली में ऐसा प्रोजेक्ट बनाना शहर के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर जल संसाधन मंत्रालय के पूर्व सचिव शशि शेखर, SANDRP के भीम सिंह रावत और पर्यावरण कार्यकर्ता भवरीन कंधारी समेत कई दिग्गजों ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल को पत्र लिखकर आगाह किया है।

विशेषज्ञों का तर्क है कि यमुना और साबरमती नदियों की भौगोलिक और जल विज्ञान संबंधी बनावट में जमीन-आसमान का अंतर है। यदि साबरमती मॉडल को यहाँ थोपा गया, तो यह नदी के प्राकृतिक बहाव और बाढ़ के पानी को सोखने की उसकी क्षमता में बड़ी बाधा बनेगा। इससे न केवल बाढ़ का जोखिम बढ़ेगा, बल्कि यमुना के बाढ़ क्षेत्रों (floodplains) का प्रबंधन भी पूरी तरह बिगड़ जाएगा। विशेषज्ञों ने मांग की है कि इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने से पहले गहन वैज्ञानिक अध्ययन और विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) किया जाना अनिवार्य है।

क्या है दिल्ली सरकार का प्लान और विवाद की वजह?

एक तरफ जहां विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं, वहीं दिल्ली सरकार इस योजना को लेकर काफी उत्साहित है। जल मंत्री प्रवेश सहिब सिंह ने पुष्टि की है कि साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (SRFDCL) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया जारी है। इस पूरे प्रोजेक्ट की प्लानिंग, डिजाइन और निर्माण की जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को सौंपी गई है।

प्रोजेक्ट की खास बातें कुछ इस प्रकार हैं:

  • दो चरणों में विकास: यह प्रोजेक्ट दो फेज में पूरा होगा। पहले चरण में वजीराबाद के पुराने रेलवे पुल से लेकर सराय काले खान के पास NH-24 तक के 24 किलोमीटर हिस्से को विकसित किया जाएगा।
  • सुविधाएं: योजना के तहत रिवरफ्रंट पर ग्रीन स्पेस, साइकिल ट्रैक और वॉकिंग पाथ बनाए जाएंगे ताकि आम जनता नदी के करीब आ सके।
  • डेडलाइन: DDA ने इस काम को पूरा करने के लिए 30 जून, 2026 की समय सीमा तय की है।

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि जब नदी प्रदूषण और क्षरण जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, तो सरकारी संसाधनों को बड़े पैमाने पर शहरी सौंदर्यीकरण में खर्च करना गलत है। उनका मानना है कि प्राथमिकता नदी की सफाई और उसके पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की होनी चाहिए, न कि कंक्रीट के ढांचे खड़े करने की।

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