विकसित भारत 2047 के लिए फूड प्रोसेसिंग और चावल उद्योग अहम, चिराग पासवान ने बताया विजन
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पाने में फूड प्रोसेसिंग और चावल उद्योग की बड़ी भूमिका होगी।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस' (BIRC) के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भारत के भविष्य के विजन पर बड़ी बात कही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के सपने को साकार करने में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर और चावल उद्योग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है।
चिराग पासवान ने कहा कि भारत में अब वह क्षमता है कि वह न केवल अपनी भूख मिटा सके, बल्कि दुनिया के अन्य देशों की खाद्य जरूरतों को भी पूरा कर सके। उन्होंने भारत को 'ग्लोबल फूड बास्केट' बनाने के लक्ष्य पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके लिए विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को मजबूत करना जरूरी है, ताकि निर्यात संबंधों को नई ऊंचाई दी जा सके।
निर्यात बढ़ाने और वैश्विक बाजार पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर गौर किया कि एक समय था जब भारत भोजन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं था और खाद्य ঘাট का सामना करता था, जिस वजह से फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों की अनदेखी हुई। लेकिन अब समय बदल चुका है। उन्होंने कहा कि देश की एक बड़ी आबादी कृषि और इससे जुड़े व्यवसायों से जुड़ी है, इसलिए वैल्यू एडिशन और फूड प्रोसेसिंग के जरिए किसानों की आय और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस कॉन्फ्रेंस के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के प्लेटफॉर्म स्टेकहोल्डर्स को अपने विचार साझा करने और वैश्विक खाद्य बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत करने का मौका देते हैं।
बता दें कि इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और भारतीय निर्यातकों को एक साथ लाता है। इस इवेंट में 153 देशों के करीब 4,856 खरीदारों सहित कुल 32,467 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। कार्यक्रम के दौरान 65 विशेषज्ञ अपनी बात रखेंगे और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए 2,000 से अधिक बिजनेस-टू-बिजनेस मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी, ताकि 2027 तक चावल की वैश्विक कीमतों और नए बाजारों के अवसरों को तलाशा जा सके।