किताबें जीवन बदलने का सशक्त माध्यम, समाज में लाती हैं सकारात्मक बदलाव: ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोच्चि इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल में कहा कि किताबें जीवन बदलने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किताबों की अहमियत पर जोर देते हुए कहा है कि पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं होतीं, बल्कि ये जीवन को बदलने, नजरिए को व्यापक बनाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक शक्तिशाली जरिया हैं। उन्होंने यह बात कोच्चि में आयोजित 29वें कोच्चि इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह के दौरान कही।
ओम बिरला ने डिजिटल युग और किताबों के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि हालांकि तकनीक ने जानकारी तक पहुंच को आसान बना दिया है, लेकिन वास्तविक ज्ञान और बुद्धिमत्ता किताबों और जीवन के अनुभवों से ही आती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किताबों का कोई विकल्प नहीं हो सकता। उनके अनुसार, पढ़ने की आदत न केवल व्यक्ति को समृद्ध बनाती है, बल्कि उसमें जिज्ञासा, संवेदनशीलता और जीवन को अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझने की क्षमता भी विकसित करती है।
ज्ञान और सूचना में अंतर, लोकतंत्र सबसे बड़ी ताकत
समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों के ज्ञान और अनुभव को संजोकर रखती हैं, जो व्यक्ति को प्रेरित करती हैं और उसमें अनुशासन व दृढ़ संकल्प की भावना पैदा करती हैं। उन्होंने सूचना (Information) और ज्ञान (Knowledge) के बीच फर्क बताते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक से सूचनाएं तो मिल जाती हैं, लेकिन गहरी समझ और संवेदनशीलता के लिए किताबें और मानवीय अनुभव अनिवार्य हैं।
भारत की विविधता पर चर्चा करते हुए ओम बिरला ने कहा कि अलग-अलग भाषाएं, धर्म और परंपराएं ही भारत की असली ताकत हैं। उन्होंने कहा कि इन भिन्नताओं के बावजूद भारत एक है और लोकतंत्र वह सबसे बड़ी शक्ति है जो पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांधे रखती है। लोकतंत्र हमें अलग-अलग विचारों और विचारधाराओं का सम्मान करना सिखाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राय अलग हो सकती है, लेकिन जब बात राष्ट्रहित की हो, तो सभी नागरिकों को एकजुट रहना चाहिए।
केरल की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने राज्य को भारत का पहला पूर्ण साक्षर राज्य बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ने ही केरल के लोगों को देश और दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने में मदद की है। साथ ही, उन्होंने नर्सिंग और स्वास्थ्य सेवाओं में केरल की महिलाओं के योगदान की भी प्रशंसा की।
बिरला ने पी.एन. पणिक्कर के पुस्तकालय आंदोलन और 'वायन दिनम' (पठन दिवस) जैसे प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि इन पहलों ने साक्षरता और सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा दी है। उन्होंने कोच्चि इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल के आयोजकों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि यह उत्सव नई पीढ़ी को पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा और एक अधिक संवेदनशील व प्रबुद्ध समाज के निर्माण में योगदान देगा।