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Blinkit Ambulance का बड़ा फैसला: अब नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर के लिए देने होंगे 2,500 रुपये

Blinkit Ambulance ने नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर के लिए 2,500 रुपये शुल्क लागू किया है ताकि गंभीर मरीजों के लिए गाड़ियां उपलब्ध रहें।

Sonu Nigam· 5 Nov, 1:42 PM · 2 मिनट
Blinkit Ambulance का बड़ा फैसला: अब नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर के लिए देने होंगे 2,500 रुपये

इमरजेंसी सेवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए Blinkit Ambulance ने अपनी पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। अब उन लोगों से 2,500 रुपये चार्ज किए जाएंगे जो बिना किसी आपातकालीन स्थिति के एम्बुलेंस का इस्तेमाल करेंगे। कंपनी का कहना है कि कई लोग रूटीन चेकअप या अस्पताल से घर जाने जैसे कामों के लिए मुफ्त एम्बुलेंस बुक कर रहे थे, जिससे वास्तव में गंभीर मरीजों को समय पर मदद मिलने में दिक्कत आ रही थी।

Eternal के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने साफ किया है कि आपातकालीन (Emergency) ट्रांसफर पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे। हालांकि, जो लोग सामान्य अस्पताल विजिट या रूटीन चेकअप के लिए एम्बुलेंस बुलाएंगे, उन्हें ट्रिप खत्म होने के बाद 2,500 रुपये का भुगतान करना होगा। यह शुल्क मोटे तौर पर निजी एम्बुलेंस ऑपरेटरों द्वारा ली जाने वाली फीस के बराबर ही रखा गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

दीपिंदर गोयल के मुताबिक, पिछले दो सालों में इस सेवा ने करीब 42,000 केस हैंडल किए हैं, जिनमें से लगभग 20,000 इमरजेंसी केस थे। उन्होंने बताया कि जब सब कुछ मुफ्त होता है, तो लोग उन कामों के लिए भी एम्बुलेंस बुक करने लगते हैं जिन्हें उबर या किसी निजी वाहन से आसानी से किया जा सकता था। ऐसी स्थिति में पैरामेडिक्स से लैस एक पूरी तरह तैयार इमरजेंसी एम्बुलेंस सड़क से हट जाती है, जो किसी गंभीर मरीज की जान बचाने के लिए जरूरी हो सकती थी।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर से इकट्ठा किया गया पैसा 'इटरनल फाउंडेशन' (Eternal Foundation) के पास जाएगा, जो इस सेवा का संचालन करता है। इस फंड का इस्तेमाल एम्बुलेंस सेवाओं के विस्तार के लिए किया जाएगा।

भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए गोयल ने कहा कि उनका लक्ष्य अगले दो से चार वर्षों में भारत के सभी प्रमुख शहरों में Blinkit Ambulance सेवा पहुंचाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रशिक्षित और संवेदनशील पैरामेडिक्स की कमी इस विस्तार में सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए उनकी ट्रेनिंग एकेडमी तेजी से काम कर रही है। कंपनी का मानना है कि 10 मिनट की यह एम्बुलेंस सेवा कई लोगों की जान बचा चुकी है और इसे केवल गंभीर आपात स्थितियों के लिए उपलब्ध रखना ही सही है।

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