टेक्नोलॉजी

NDMC ने 9 स्कूलों में शुरू किया AI लिटरेसी प्रोग्राम, 2700 से ज्यादा छात्र सीखेंगे भविष्य की तकनीक

NDMC ने 9 स्कूलों के करीब 2,741 छात्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) साक्षरता कार्यक्रम शुरू किया है। जानें क्या सीखेंगे छात्र।

Sonu Nigam· 5 Nov, 8:39 PM · 2 मिनट
NDMC ने 9 स्कूलों में शुरू किया AI लिटरेसी प्रोग्राम, 2700 से ज्यादा छात्र सीखेंगे भविष्य की तकनीक

नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने अपने स्कूलों के छात्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए एक बड़ी पहल की है। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को NDMC ने आधिकारिक तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लिटरेसी प्रोग्राम की शुरुआत की। इस खास कार्यक्रम का शुभारंभ NDMC के चेयरमैन मनोज कुमार द्विवेदी ने सरोजिनी नगर स्थित नव्युग स्कूल में किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को उन तकनीकी कौशलों से लैस करना है, जो आने वाले समय में करियर और शिक्षा के लिए बेहद जरूरी होने वाले हैं।

यह प्रोग्राम सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड गवर्नेंस (CPRG) के साथ रणनीतिक साझेदारी में चलाया जा रहा है। फिलहाल, यह पहल NDMC के नौ स्कूलों में लागू की गई है, जिससे कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लगभग 2,741 छात्र लाभान्वित होंगे। छात्रों को तकनीक की बारीकियों को समझाने के लिए एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।

12 हफ्तों में सीखेंगे जेनेरेटिव AI और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग

इस कोर्स को 12 हफ्तों की अवधि के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें छात्रों को केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी। इस प्रोग्राम के तहत छात्र मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजें सीखेंगे:

  • जेनेरेटिव AI: एआई के जरिए नई सामग्री कैसे बनाई जाती है।
  • प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग: एआई सिस्टम से सही और सटीक उत्तर पाने के लिए सही निर्देश (प्रॉम्प्ट) देना।
  • AI-असिस्टेड लर्निंग: पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया में एआई का सही इस्तेमाल कैसे करें।
  • कंटेंट क्रिएशन और वेरिफिकेशन: एआई द्वारा बनाई गई जानकारी की विश्वसनीयता की जांच करना और कंटेंट तैयार करना।

इस मौके पर NDMC चेयरमैन मनोज कुमार द्विवेदी ने कहा कि इस पहल का प्राथमिक लक्ष्य छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी समझ प्रदान करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई तकनीक वर्तमान में वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव ला रही है, और ऐसे में छात्रों का इस तकनीक से परिचित होना अनिवार्य है। यह प्रोग्राम न केवल छात्रों की तकनीकी दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि उनकी रचनात्मक क्षमता को भी निखारेगा और उन्हें यह सिखाएगा कि शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीकों का व्यावहारिक उपयोग कैसे किया जा सकता है।

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