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दिल्ली मे 47.6 लाख लोगों के नाम कटे, मामला सुप्रीम कोर्ट पंहुचा।

दिल्ली की वोटर लिस्ट से 47.6 लाख नाम हटा दिए गए हैं। अब नाम वापस जुड़वाने की प्रक्रिया और कानूनी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

Sonu Nigam· 24 Oct, 12:33 PM · 2 मिनट
दिल्ली मे 47.6 लाख लोगों के नाम कटे, मामला सुप्रीम कोर्ट पंहुचा।

दिल्ली की मतदाता सूची में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने लाखों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के बाद दिल्ली की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स से लगभग 47.6 लाख नाम हटा दिए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, ये नाम उन लोगों के हैं जो या तो शिफ्ट हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, या जिनके नाम डुप्लीकेट पाए गए थे।

31 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि, अब असली समस्या नाम वापस जुड़वाने को लेकर खड़ी हो गई है। 22 अक्टूबर 2026 तक केवल 2,50,754 लोगों ने ही फॉर्म 6 भरकर अपना नाम शामिल करने या दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन किया है। इसमें नए वोटर और वे लोग दोनों शामिल हैं जिनके नाम सूची से काटे गए थे।

फॉर्म 6 और कानूनी पेंच: सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा मामला

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा विवाद 'फॉर्म 6' को लेकर है। कानूनी जानकारों और याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फॉर्म 6 में आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि वह "पहली बार" पंजीकरण करा रहा है। अब सवाल यह है कि जिस व्यक्ति का नाम पहले से लिस्ट में था और अब काट दिया गया है, वह कैसे कह सकता है कि वह पहली बार आवेदन कर रहा है? विशेषज्ञों का डर है कि ऐसी घोषणा करने पर उन वोटर्स पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कानूनी कार्रवाई या मुकदमा चलाया जा सकता है।

इसी गंभीर मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 28 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होनी है। याचिका में मांग की गई है कि नाम बहाली के लिए एक ऐसा तंत्र बनाया जाए जिसमें वोटर को कोई गलत घोषणा न करनी पड़े।

आंकड़ों पर नजर डालें तो 20 सितंबर से शुरू हुए विशेष पंजीकरण शिविरों के जरिए अब तक दिल्ली में करीब 89,000 कैंप लगाए गए, जिनसे 1,58,470 फॉर्म 6 प्राप्त हुए। सबसे ज्यादा आवेदन पश्चिम दिल्ली से आए हैं, जबकि नई दिल्ली जिले में सबसे कम आवेदन दर्ज किए गए। इसके अलावा, 31 अगस्त से पहले भी 2,12,400 आवेदन प्रोसेस किए जा चुके थे।

फिलहाल, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर उन 47.6 लाख लोगों के स्टेटस की जांच कर रहे हैं जिनके नाम हटाए गए हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम समय सीमा 30 नवंबर 2026 है, जिसके बाद 4 दिसंबर 2026 को अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी जाएगी।

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