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RSS का अहम फैसला: अब हर साल के बदले 3 साल में एक बार होगी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा

RSS ने अपनी सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली संस्था 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' के आयोजन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। जानें क्या है नया प्लान।

Sonu Nigam· 24 Oct, 10:40 AM · 2 मिनट
RSS का अहम फैसला: अब हर साल के बदले 3 साल में एक बार होगी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने काम करने के तरीके और संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, संघ ने यह निर्णय लिया है कि उसकी सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्था, 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' (ABPS) का आयोजन अब हर साल के बजाय तीन साल में एक बार किया जाएगा। यह कदम संगठन के कामकाज को और अधिक विकेंद्रीकृत करने और जमीनी स्तर पर काम की रफ्तार बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अब तक की परंपरा के अनुसार, संघ की यह महत्वपूर्ण बैठक हर साल मार्च के महीने में आयोजित की जाती थी। इस बैठक में विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा की जाती थी, नीतिगत मुद्दों पर चर्चा होती थी और आने वाले साल के लिए संगठनात्मक प्राथमिकताएं तय की जाती थीं। लेकिन अब प्रस्तावित बदलाव के तहत, नागपुर में होने वाली इस केंद्रीय बैठक का आयोजन तीन साल के अंतराल पर होगा।

क्षेत्रीय बैठकों पर बढ़ेगा जोर और बदलेंगे नियम

संगठन को और मजबूत बनाने के लिए RSS अब क्षेत्रीय बैठकों पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगा। नए ढांचे के तहत, देशभर के सभी नौ RSS क्षेत्रों में वार्षिक क्षेत्रीय प्रतिनिधि बैठकें आयोजित की जाएंगी। इससे स्थानीय स्तर की समस्याओं और प्राथमिकताओं को अधिक नियमित रूप से संबोधित किया जा सकेगा।

सूत्रों का कहना है कि नागपुर में होने वाली केंद्रीय बैठक अब मुख्य रूप से बड़े नीतिगत फैसलों पर केंद्रित होगी। साथ ही, यह बैठक उन वर्षों में आयोजित की जाएगी जब सरकार्यवाह (महासचिव) का चुनाव होना होगा। यह बदलाव संकेत देता है कि संघ अब अपनी निर्णय लेने की प्रक्रिया को केवल केंद्र तक सीमित न रखकर उसे क्षेत्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाना चाहता है।

यहाँ यह समझना जरूरी है कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा और अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल (ABKM) में अंतर है। ABKM संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी है, जिसकी बैठक आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर में सीमित पदाधिकारियों के साथ होती है। जबकि प्रतिनिधि सभा एक बड़ा मंच है जहाँ पूरे देश के प्रतिनिधि जुटते हैं। इस नए बदलाव से संघ के जमीनी नेटवर्क के साथ जुड़ाव और गहरा होने की उम्मीद है।

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