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जामिया यूनिवर्सिटी: प्रशासन के नोटिस को छात्रों ने किया खारिज, कहा- मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने प्रशासन के नोटिस को ठुकराया है। छात्रों का कहना है कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

Sonu Nigam· 26 Oct, 1:15 PM · 2 मिनट
जामिया यूनिवर्सिटी: प्रशासन के नोटिस को छात्रों ने किया खारिज, कहा- मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन

देश की प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा जारी किए गए हालिया नोटिस को प्रदर्शनकारी छात्रों ने सिरे से खारिज कर दिया है। छात्रों का साफ कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी। पिछले 14 दिनों से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र छात्र संघ (Students' Union) की बहाली और चुनाव के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करना है।

मीडिया में आ रही उन खबरों पर भी छात्रों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने प्रशासन के आश्वासनों को स्वीकार कर लिया है और विरोध खत्म कर दिया है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि ऐसी खबरें केवल प्रशासन के नजरिए से पेश की गई हैं और वास्तविकता इससे अलग है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि प्रशासन ने जो नोटिस जारी किया है, उसमें छात्र संघ की बहाली को लेकर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं दिखाई गई है।

अस्पष्ट आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं छात्र

छात्रों ने प्रशासन के नोटिस को 'अस्पष्ट' बताते हुए कहा कि इसमें इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि छात्र संघ के संविधान को कब तक मंजूरी दी जाएगी या चुनाव कराने का रोडमैप क्या होगा। इसके अलावा, छात्रों ने प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी, जिसका नोटिस में कोई जवाब नहीं दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल नोटिस जारी कर देने से समस्या हल नहीं होती, बल्कि उन्हें लिखित में एक निश्चित समय सीमा के साथ प्रतिबद्धता चाहिए।

गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सोमवार को घोषणा की थी कि करीब दो दशकों के बाद छात्र संघ के चुनाव कराए जाएंगे। रजिस्ट्रार प्रोफेसर महताब आलम रिजवी द्वारा जारी आदेश में कहा गया था कि संविधान की मंजूरी के 15 दिनों बाद चुनाव होंगे। हालांकि, छात्र इसे अधूरा कदम मान रहे हैं क्योंकि संविधान की मंजूरी की कोई तारीख तय नहीं की गई है।

जामिया में छात्र संघ को साल 2006 में भंग कर दिया गया था, जिसके बाद से इसे बहाल करने की मांग लगातार उठती रही है। अब छात्रों ने दो टूक कह दिया है कि वे किसी भी तरह के गोल-मोल जवाब को स्वीकार नहीं करेंगे और जब तक चुनाव की तारीखों और अन्य मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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