दिल्ली एनसीआर

पटाखों पर प्रतिबंध: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और CAQM को फटकारा, कहा- 'मजाक बन गए निर्देश'

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और CAQM को पटाखों पर प्रतिबंध लागू न करने पर फटकारा। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक निर्देश अब सिर्फ किताबी रह गए हैं।

Sonu Nigam· 29 Oct, 9:19 PM · 2 मिनट
पटाखों पर प्रतिबंध: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और CAQM को फटकारा, कहा- 'मजाक बन गए निर्देश'

दिल्ली और एनसीआर में दिवाली से पहले वायु प्रदूषण की समस्या एक बार फिर गंभीर हो गई है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू न करने के लिए दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वायु गुणवत्ता को लेकर दिए गए न्यायिक निर्देश अब केवल "किताबी" बनकर रह गए हैं और बार-बार होने वाले उल्लंघन किसी "मजाक" से कम नहीं हैं।

अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसके जरिए दिवाली से पहले प्रदूषण नियंत्रण के प्रोटोकॉल को और स्पष्ट किया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 'ग्रीन पटाखों' की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए। बेंच ने स्पष्ट किया कि ग्रीन पटाखे भी पारंपरिक पटाखों की तुलना में लगभग 70% तक हानिकारक धुआं छोड़ते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है।

जमीनी हकीकत और सरकारी दावों में बड़ा अंतर

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन एजेंसियों से तीखे सवाल पूछे कि क्या उनकी टीमों ने वास्तव में चिन्हित क्षेत्रों का दौरा किया और क्या उनके पास कोई ठोस डेटा है? कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे बार-बार एक ही तरह की दलीलें देने के बजाय जमीन पर वास्तविक परिणाम दिखाएं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान जरूरी है, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि प्रदूषण रोकने के लिए तंत्र मौजूद है और दिल्ली सरकार ने अपनी विंटर स्ट्रेटजी के तहत 608 एंटी-स्मॉग गन तैनात की हैं। हालांकि, कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट ने इन दावों की पोल खोल दी। रिपोर्ट के मुताबिक, CAQM की कुल 29 इकाइयों में से केवल नौ ही सक्रिय रूप से काम कर रही थीं।

युवा पीढ़ी को जागरूक करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक दिलचस्प सुझाव भी दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को विराट कोहली जैसी मशहूर हस्तियों की मदद लेनी चाहिए, ताकि युवाओं को पटाखों के पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे असर के बारे में समझाया जा सके। इसके साथ ही, कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे विभिन्न जोन में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के उतार-चढ़ाव का डेटा जुटाएं, ताकि GRAP-1 के प्रभाव का सही आकलन किया जा सके।

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