स्वास्थ्य

बेटी को खोने के बाद पिता ने शुरू किया तराशा फाउंडेशन,डिसऑर्डर के मरीजों को मिलेगी मदद।

बेटी को खोने के बाद पिता ने शुरू किया तराशा फाउंडेशन, अब भारत में दुर्लभ लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर के मरीजों को मिलेगी मदद।

Sonu Nigam· 25 Oct, 9:36 AM · 2 मिनट
बेटी को खोने के बाद पिता ने शुरू किया तराशा फाउंडेशन,डिसऑर्डर के मरीजों को मिलेगी मदद।

एक पिता के लिए अपनी संतान को खोने से बड़ा कोई दुख नहीं होता, लेकिन जब यही दुख दूसरों के काम आने का जरिया बन जाए, तो वह एक मिसाल बन जाता है। दिल्ली में 'तराशा फाउंडेशन' की शुरुआत कुछ ऐसी ही भावना के साथ की गई है। यह फाउंडेशन उन परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, जिनके बच्चे लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर (LSD) जैसी दुर्लभ और जटिल आनुवंशिक बीमारियों से जूझ रहे हैं।

इस नेक पहल के पीछे एक भावुक कहानी है। स्वास्थ्य क्षेत्र की जानी-मानी शख्सियत करन भार्गव ने अपनी बेटी तराशा भार्गव की याद में इस संस्था की नींव रखी है। तराशा 18 सितंबर, 2025 को 'फ्यूकोसिडोसिस' (Fucosidosis) नामक एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी के कारण दुनिया को अलविदा कह गई थीं। जब तराशा महज 18 महीने की थीं, तब उनके विकास में देरी देखी गई, जिसके बाद इस बीमारी का पता चला। इलाज के दौरान भार्गव परिवार को भारत में जरूरी दवाओं की कमी और स्टेम सेल डोनर्स की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। इसी संघर्ष और दर्द ने उन्हें प्रेरित किया कि देश के अन्य परिवारों को इस मुश्किल दौर में अकेला न छोड़ा जाए।

दुर्लभ बीमारियों के खिलाफ जंग और फाउंडेशन का लक्ष्य

फ्यूकोसिडोसिस एक ऐसी जेनेटिक बीमारी है जो दुनिया में 20 लाख लोगों में से किसी एक को होती है। वर्तमान में इसका कोई पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही समय पर पहचान और बेहतर देखभाल से जीवन की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है। तराशा फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य मरीजों के निदान (Diagnosis) की प्रक्रिया को तेज करना और उन्हें सही इलाज तक पहुंचाना है।

फाउंडेशन के जरिए निम्नलिखित लक्ष्यों पर काम किया जाएगा:

  • रजिस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म: एक समर्पित प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा ताकि मरीजों का डेटाबेस तैयार हो और उनकी पहचान जल्दी हो सके।
  • दवाओं की उपलब्धता: DCGI, US FDA और EMA जैसी संस्थाओं से दवाओं की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने के लिए वकालत करना।
  • आधुनिक तकनीक: जीन थेरेपी, CRISPR तकनीक और एंजाइम इंजीनियरिंग जैसे वैश्विक शोधों पर नजर रखना ताकि भारत में 'एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी' को लाया जा सके।
  • पारिवारिक सहयोग: दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे परिवारों को भावनात्मक संबल और सही मार्गदर्शन प्रदान करना।

तराशा फाउंडेशन न केवल चिकित्सा सहायता, बल्कि एक ऐसे समुदाय के निर्माण की कोशिश कर रहा है जहां दुर्लभ बीमारियों से प्रभावित परिवार एक-दूसरे का सहारा बन सकें और मिलकर स्वास्थ्य मानकों में सुधार की मांग कर सकें।

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