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ISRO ने रचा इतिहास: NVS-03 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण, पीएम मोदी और बिहार सीएम ने दी बधाई

ISRO ने GSLV-F18 रॉकेट के जरिए NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया है। पीएम मोदी और बिहार सीएम ने इस उपलब्धि को सराहा।

Sonu Nigam· 31 Oct, 12:13 PM · 2 मिनट
ISRO ने रचा इतिहास: NVS-03 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण, पीएम मोदी और बिहार सीएम ने दी बधाई

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर दुनिया को अपनी ताकत दिखाते हुए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। शुक्रवार को GSLV-F18 रॉकेट के जरिए भेजे गए इस उपग्रह ने अपनी निर्धारित कक्षा (GTO) में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है। इस बड़ी कामयाबी के बाद देशभर में खुशी की लहर है और देश के दिग्गज नेताओं ने इसरो के वैज्ञानिकों के जज्बे को सलाम किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिशन की सफलता पर इसरो के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह मिशन भारत के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम 'NavIC' को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। पीएम ने जोर देकर कहा कि NVS-03 की उन्नत क्षमताएं देश में महत्वपूर्ण तकनीकों के मामले में आत्मनिर्भरता को बढ़ाएंगी और आम लोगों के लिए नेविगेशन सेवाओं को और बेहतर बनाएंगी।

वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक

इस उपलब्धि पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने इसरो की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे भारत की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी कौशल और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां दुनिया भर में भारत का मान बढ़ा रही हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रही हैं।

वहीं, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस अब्दुल नजीर ने भी इस प्रक्षेपण को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया और पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।

तकनीकी रूप से देखें तो NVS-03 इसरो की अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) के तहत सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना है। इस सैटेलाइट की खास बात यह है कि इसमें स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक के साथ-साथ अन्य एटॉमिक क्लॉक भी लगी हैं। साथ ही, इसमें L5 और S-बैंड सिग्नल्स के अलावा अब L1 नेविगेशन सिग्नल को भी जोड़ा गया है, जिससे NavIC की क्षमताएं और बढ़ गई हैं। यह सिस्टम न केवल पूरे भारत को कवर करेगा, बल्कि देश की भौगोलिक सीमा से 1,500 किलोमीटर दूर तक के क्षेत्र में भी नेविगेशन सेवाएं प्रदान करेगा।

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