अंकिता भंडारी के माता-पिता का राजघाट पर प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस ने हटाया
दिल्ली पुलिस ने राजघाट पर अनधिकृत प्रदर्शन कर रहे अंकिता भंडारी के माता-पिता को हटाया। परिवार सीबीआई जांच और वीआईपी एंगल की मांग कर रहा है।
अपनी बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की जंग लड़ रहे माता-पिता को बुधवार को दिल्ली पुलिस ने राजघाट से हटा दिया। वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी राजघाट स्मारक के पास अनधिकृत तरीके से धरना दे रहे थे, जिसे पुलिस ने सुरक्षा कारणों और नियमों का हवाला देते हुए समाप्त कराया। इस दौरान उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भायना और कांग्रेस नेता मुमताज पटेल भी मौजूद थे।
जानकारी के मुताबिक, परिवार शुरू में राजघाट पर प्रार्थना करने और मीडिया से बात करने पहुंचा था, लेकिन बाद में उन्होंने स्मारक के सार्वजनिक गेट के पास धरना शुरू कर दिया। पुलिस का कहना है कि राजघाट विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान नहीं है और इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बार-बार अनुरोध करने के बाद ही समूह को हटाया गया और माता-पिता को हिरासत में नहीं लिया गया।
स्वास्थ्य बिगड़ने पर अस्पताल ले जाई गईं मां
पुलिस कार्रवाई के दौरान अंकिता की मां सोनी देवी की तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत बुराड़ी सरकारी अस्पताल ले जाया गया। वहां उनका मेडिको-लीगल परीक्षण होना था, लेकिन सोनी देवी और उनके पति ने जांच कराने से इनकार कर दिया। बाद में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक संजीव झा के साथ वे अस्पताल से रवाना हो गए।
अंकिता भंडारी के माता-पिता साल 2022 में हुई उनकी 19 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में 'वीआईपी एंगल' की गहन जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग यह है कि जब तक सीबीआई (CBI) की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति को निलंबित किया जाए।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब परिवार को विरोध के दौरान पुलिस का सामना करना पड़ा; इससे पहले 14 अक्टूबर 2026 को इंडिया गेट के पास प्रदर्शन के दौरान भी उन्हें हिरासत में लिया गया था। सितंबर 2022 में हुई इस हत्या के मामले में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।